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दिल्ली के तीन मूर्ति चौक पर किनकी लगीं हैं मूर्तियां, इजराइल से जुड़ा है इतिहास

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दिल्ली के तीन मूर्ति चौक पर किनकी लगीं हैं मूर्तियां, इजराइल से जुड़ा है इतिहास

दिल्ली के तीन मूर्ति चौक पर किनकी लगीं हैं मूर्तियां, इजराइल से जुड़ा है इतिहास

नई दिल्ली: अगर आपकी इतिहास में दिलचस्पी है या फिर दिल्ली में रहते हैं, तो आपने दिल्ली के ‘तीम मूर्ति चौक’ के बारे में जरूर सुना होगा। इस चौराहे पर ‘तीन मूर्ति भवन’ है, जो पहले प्रधानमंत्री आवास हुआ करता था। इसे बाद में प्रधानमंत्री संग्राहलय में बदल दिया गया। तीन मूर्ति चौक का इजराइल के साथ ऐतिहासिक संबंध है। अगर आप कभी यहां गए हैं, तो आपने चौराहे पर लगीं तीन मूर्तियां भी देखी होंगी। लेकिन क्या आप जानते हैं कि ये तीन मूर्तियां किसकी हैं। आज हम आपको दिल्ली के इसी तीन मूर्ति चौक की कहानी बताने जा रहे हैं।

किसकी हैं चौक पर लगीं तीन मूर्तियां?

आपको बता दें कि ये तीनों मूर्ति तांबे की बनी हैं। तीन मूर्ति चौक पर लगी मूर्तियां हैदराबाद, जोधपुर और मैसूर लेंसर्स को रि-प्रेजेंट करती हैं। ये तीनों 15 इम्पिरियल सर्विस कैवलरी ब्रिगेड का हिस्सा रह चुके हैं। भारत के इन योद्धाओं को इजराइल में शौर्य प्रतीक के रूप में जाना जाता है। दरअसल, 23 सितंबर 1918 को इजराइल के हाइफा शहर में एक युद्ध हुआ था। इस युद्ध में राजपूत सेना का नेतृत्व जोधपुर रियासत के सेनापति दलपत सिंह ने किया। इस युद्ध में करीब 900 राजपूत सैनिक वीरगति को प्राप्त हुए। अंत में राठौड़ों ने युद्ध जीता और हाइपा शहर पर कब्जा कर लिया।

रणबांका राठौड़ों के शौर्य को दिलाती हैं याद

रणबांका राठौड़ों के शौर्य को दिलाती हैं याद

युद्ध में भारतीयों के साहस से खुश होकर ब्रिटिश सेना के कमांडर-इन-चीफ ने फ्लैग-स्टाफ हाउस के नाम से अपने लिए एक रिहायसी भवन का निर्माण करवाया। ये भवन जिस चौराहे पर बनाया, वहां एक स्तंभ के किनारे तीन दिशाओं में मुंह किए हुए तीन सैनिकों की मूर्तियां लगी हुई हैं। ये तीनों मूर्तियां रणबांका राठौड़ों की बहादुरी को याद दिलाती हैं। इसी चौराहे को तीन मूर्ति चौक कहते हैं।

2018 में बदला गया था चौराहे का नाम

2018-

साल 2018 में इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू जब भारत दौरे पर आए थे तो तीन मूर्ति चौक भी गए थे। भारत सरकार ने इस चौक का नाम बदलकर इजराइली शहर हाइफा के नाम पर रख दिया है। अब इसे तीन मूर्ति हाइफा चौक कहा जाता है। लेकिन आम बोलचाल में लोग इसे आज भी तीन मूर्ति के नाम से ही जानते हैं।

इजराइल में बच्चों को पढ़ाई जाती है कहानी

इजराइल में बच्चों को पढ़ाई जाती है कहानी

तीन मूर्ति चौक पर लगी रणबांका राठौड़ों के शौर्य की कहानियों को इजराइल के स्कूलों में पढ़ाया जाता है। इजराइली बच्चा बच्चा हाइफा में हुए युद्ध की कहानी ठीक वैसे ही जानता है, जैसे भारत के बच्चे महाभारत और रामायण की कहानी जानते हैं। इजरायल की सरकार आज भी हाइफा, यरुशलम, रमल्लाह और ख्यात के समुद्री तटों पर बनी 900 भारतीय सैनिकों की समाधियों की अच्छी तरह देखरेख करती है।

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