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सवाल 83- क्या है डकवर्थ लुइस नियम, इसके नाम के पीछे क्या है इतिहास?

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हम अक्सर क्रिकेट में बारिश होने पर डकवर्थ लुइस नियम लागू होने का नाम सुनते है। अभी 2019 क्रिकेट विश्व कप का सेमीफाइनल मैच भारत और न्यूज़ीलैंड के बीच खेला जा रहा है। इस मैच में भी डकवर्थ लुइस नियम लागू करने की चर्चा हो रही है। डकवर्थ लुइस नियम का पूरा नाम डकवर्थ लुईस स्टर्न (DLS) है। आइए जानते हैं कि क्या है इससे जुड़ा नियम और इसे बनाने वाले कौन है-

आगे जानने से पहले हम एक घटना पर गौर करेंगे जो 1992 वर्ल्डकप में हुई थी। हुआ यूँ था कि इंग्लैंड को हराने के लिए अफ़्रीका को 13 गेंदों में 22 रन बनाने थे, लेकिन तभी आसमान ने गिरती बारिश ने खेल को रोक दिया।

इसके 10 मिनट बाद जब बारिश रुकी और दक्षिण अफ़्रीकी बल्लेबाज़ मैदान पर लौटे तो स्कोरबोर्ड पर नया लक्ष्य फ्लैश किया। दक्षिण अफ़्रीकी टीम को जीत के लिए एक गेंद पर 21 रन बनाने थे। उस समय यह गणित किसी को समझ में नहीं आया। दक्षिण अफ्रीका ये मैच न जीत सकी।

इस मैच में रेडियो पर कमेंट्री सुन रहे एक ब्रिटिश स्टेटिशियन फ्रैंक डकवर्थ ने तय किया कि वह एक ऐसे नियम को बनाएंगे जो बारिश होने पर दोनों टीमों के लिए निष्पक्ष रूप से फ़ायदा पहुचाये और बारिश की वजह से रुके मैच का इस नियम से समाधान निकल सके।

डकवर्थ ने 1992 में ही रॉय स्टेटस्टिकल सोसाइटी में एक पेपर पेश किया था जिसका टाइटल था- ‘ख़राब मौसम में निष्पक्ष खेल।’ इस पेपर पर आगे का काम यूनिवर्सिटी ऑफ द वेस्ट ऑफ इंग्लैंड के लेक्चरर टोनी लुईस ने किया। दोनों गणितज्ञों ने फैक्स के ज़रिए नियम को आख़िरी रूप दिया। इन दोनों के नाम के कारण इस नियम का नाम ‘डकवर्थ लुइस’ पड़ा। इसको फ्रैंक डकवर्थ के डकवर्थ और टोनी लुइस के लुइस को मिलाकर नाम दिया गया है।

फ्रैंक डकवर्थ (बाएँ) और टोनी लुईस (दाएँ)

जब यह नियम प्रतिपादित हो गया तब इंग्लैंड ने इस नियम की तरफदारी की और इसे ICC तक पहुंचाया। 1997 में पहली बार डकवर्थ लुईस नियम को इंग्लैंड और जिम्बाम्वे के बीच हुए मैच में लागू किया गया। इस मैच को ज़िम्बॉब्वे ने जीता था। आगे इस नियम को इसके बाद साल 1998 में न्यूज़ीलैंड, वेस्टइंडीज़, इंडिया, पाकिस्तान और साउथ अफ़्रीका के मैचों में लागू किया गया।

ICC ने वर्ल्डकप में डकवर्थ लुईस नियम को साल 1999 में शामिल किया। हालांकि तब इंग्लैंड में मौसम 2019 की तरह नहीं था जिसकी वजह से यह नियम 1999 के वर्ल्ड कप में इस्तेमाल नहीं हो पाया। ICC ने 2001 में औपचारिक रूप से डकवर्थ लुईस नियम को अपना लिया। इसे ट्रायल के तौर पर क्रिकेट के सभी फॉरमेट्स में इस्तेमाल किया जाने लगा।

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2004 में स्थायी तौर पर डकवर्थ लुईस नियम आईसीसी का हिस्सा बन गया। डकवर्थ और लुईस रिटायर होने के बाद प्रोफ़ेसर स्टीव स्टर्न इसके सरंक्षक बनाए गए। 2014 में इस नियम का नाम बदलकर डकवर्थ लुईस स्टर्न (DLS)हो गया। आज तक ये नियम 220 से ज़्यादा मैचों में इस्तेमाल हो चुका है।

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