Covid in Delhi: 20 दिन बाद ही दोबारा संक्रमण हो सकता है, लेकिन सीवियरिटी की संभावना न के बराबर: एक्सपर्ट h3>
नई दिल्ली: दिल्ली में भी एक बार फिर से कोरोना के बढ़ते मामले देखे जा रहे हैं। संक्रमण दर और नए मरीजों की संख्या में इजाफे के बावजूद एक्सपर्ट्स का कहना है कि ह्यूमन बिहेवियर, वायरस का बिहेवयर और मौसम में बदलाव की वजह से यह स्थिति बनी है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि पैनिक वाली स्थिति बिल्कुल नहीं है। एक्सपर्ट ने यह जरूर माना कि रिइन्फेक्शन हो सकताा है, कोविड से ठीक होने के 20 दिन बात से ही रिइन्फेक्शन का खतरा है। लेकिन इस प्रकार का इन्फेक्शन बहुत माइल्ड होता है। एक्सपर्ट्स का यहां तक कहना है कि कोविड अब कहीं जाने वाला नहीं। इन्फ्लूएंजा या एडिनो वायरस की तरह अब यहीं रहेगा। आनेवाले दिनों में कोरोना की वजह से कॉमन कोल्ड होगा, जैसे अभी इन्फ्लूएंजा वायरस से होता है। इसलिए इस तरह के स्पाइक से डरने की बात नहीं, हां एहतियात जरूर बरतें और नियमों का पालन करें।
एलएनजेपी के मेडिकल डायरेक्टर डॉक्टर सुरेश कुमार ने बताया कि लोगों के व्यवहार और वायरस के व्यवहार, दोनों की वजह से यह स्थिति बन रही है। वायरस में कुछ न कुछ बदलाव होता रहता है और जब भी समय बदलता है कि वायरस एक्टिव भी हो जाता है। यही वाली स्थिति अभी बनती दिख रही है। ऊपर से अब लोग लापरवाह हो गए हैं, मास्क नहीं लगा रहे हैं। सावधानी जरूरी है। वैक्सीनेशन कराएं। बूस्टर डोज लें। उन्होंने कहा कि पिछले तीन दिनों में कोविड एडमिशन बढ़ा है। पहले जहां एक दिन में एक मरीज आता था, वह तीन दिनों में चार से पांच हो गए हैं। अभी कुल 18 मरीज एडमिट हैं। एक मरीज वेंटिलेटर पर है, लेकिन वह पहले से टीबी का मरीज रहा है। तीन से चार मरीज को हार्ट की बीमारी है। बाकी 13 मरीज स्टेबल हैं।
अभी तक दिल्ली में ओमिक्रॉन का सब वेरिएंट BA.2 और अन्य सब वेरिएंट ही मिला है। कोई नया वेरिएंट नहीं मिला है। दिल्ली सरकार के आदेश के अनुसार, जितने भी मरीज एडमिट हो रहे हैं, हम सबकी जीनोम सिक्वेंसिंग करा रहे हैं, ताकि अगर कोई नया वेरिएंट हो तो इसका पता चल सके।
डॉक्टर सुरेश कुमार, डायरेक्टर, एलएनजेपी हॉस्पिटल
इस बारे में मैक्स साकेत के इंटरनल मेडिसिन के एक्सपर्ट डॉक्टर रोमेल टिक्कू ने कहा कि यह सही है कि लोगों का व्यवहार बदल गया है, इसलिए नए मरीजों की संख्या और संक्रमण बढ़ा है। इसकी एक वजह यह हो सकती है कि ट्रैवल बहुत बढ़ गया है, लोगों का मूवमेंट काफी हो रहा है। लेकिन, अभी तक जो स्थिति दिख रही है वह नियंत्रण में दिख रही है। संक्रमण के बाद भी हॉस्पिटल एडमिशन न के बराबर है। मरीज के लंग्स में इन्फेक्शन बहुत कम हो रहा है। ऑक्सिजन की जरूरत नहीं पड़ रही है। सीवियरिटी नहीं है। कुल मिलाकर संक्रमण के बाद भी माइल्ड असर हो रहा है। इसलिए, इसको लेकर पैनिक की स्थिति न बनाएं और न ही लापरवाह बनें। यह वायरस है और इसे हल्के में लेने की जरूरत नहीं।
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रिइन्फेक्शन का खतरा तो रहता है। अगर किसी को जनवरी में संक्रमण हुआ है तो अभी दोबारा संक्रमण हो सकता है। इस प्रकार के संक्रमण में अक्सर यह देखा जा रहा है कि मरीज को बहुत माइल्ड असर करता है। नॉर्मल फीवर और जुकाम होता है। कई को तो संक्रमण का पता भी नहीं चलता।
डॉक्टर रोमेल टिक्कू, मैक्स साकेत
आकाश हॉस्पिटल के रेस्पिरेटरी डिपार्टमेंट के डॉक्टर अक्षय बुद्धराजा ने कहा कि यह सीजनल वैरिएशन की वजह से हो रहा है। जब भी सीजन चेंज होगा तो इस प्रकार का उछाल आ सकता है। यह वेव नहीं है, यह स्पाइक है। यह अभी आता रहेगा। डॉक्टर अक्षय ने कहा कि अगर किसी को कोरोना हुआ है तो 20 दिन के बाद उसे दोबारा इन्फेक्शन हो सकता है। लेकिन यह बहुत माइल्ड होता है। जब भी मौसम बदलेगा तो इस तरह का स्पाइक आएगा, अभी दो से तीन हफ्ते मामले बढ़ेगें और फिर यह कम हो जाएगा। अगला स्पाइक जब सर्दी की शुरुआत होगी तो उस समय आ सकता है।
एक नया स्पाइक दिख रहा है। हालांकि कोई नया वेरिएंट नहीं है। अभी देश में ओमिक्रॉन और इसका सब वेरिएंट ही फैल रहा है। ओमिक्रॉन के ही 4 सब वेरिएंट देश में मिले हैं। इसमें मरीज को एक दो दिन का फीवर, गले में खराश होती है। 5 से 7 दिनों में लोग ठीक हो जा रहे हैं। एडमिशन की जरूरत नहीं हो रही है, इसलिए पैनिक न हों।
डॉक्टर अक्षय बुद्धराजा, रेस्प्रेट्री एक्सपर्ट, आकाश हॉस्पिटल
उन्होंने कहा कि कोरोना एक वायरल इन्फेक्शन है। यह भी इन्फ्लूएंजा और एडिनो वायरस की तरह हो जाएगा। अभी कॉमन कोल्ड होता है तो इसकी वजह इन्फ्लूएंजा होती है। आनेवाले दिनों में कोरोना की वजह से कॉमन कोल्ड यानी सर्दी, खांसी, जुकाम और फीवर हो सकता है। एक तरह से यह मामूली फ्लू बनकर रह जाएग। जो संख्या अभी दिख रही है, उससे ज्यादा लोग संक्रमित होंगे। डोमेस्टिक ट्रैवल में जांच शुरू कर दी जाए तो नंबर दो से तीन गुना बढ़ सकते हैं। लेकिन इसकी जरूरत नहीं, क्योंकि सीवियरिटी नहीं है।
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एलएनजेपी के मेडिकल डायरेक्टर डॉक्टर सुरेश कुमार ने बताया कि लोगों के व्यवहार और वायरस के व्यवहार, दोनों की वजह से यह स्थिति बन रही है। वायरस में कुछ न कुछ बदलाव होता रहता है और जब भी समय बदलता है कि वायरस एक्टिव भी हो जाता है। यही वाली स्थिति अभी बनती दिख रही है। ऊपर से अब लोग लापरवाह हो गए हैं, मास्क नहीं लगा रहे हैं। सावधानी जरूरी है। वैक्सीनेशन कराएं। बूस्टर डोज लें। उन्होंने कहा कि पिछले तीन दिनों में कोविड एडमिशन बढ़ा है। पहले जहां एक दिन में एक मरीज आता था, वह तीन दिनों में चार से पांच हो गए हैं। अभी कुल 18 मरीज एडमिट हैं। एक मरीज वेंटिलेटर पर है, लेकिन वह पहले से टीबी का मरीज रहा है। तीन से चार मरीज को हार्ट की बीमारी है। बाकी 13 मरीज स्टेबल हैं।
अभी तक दिल्ली में ओमिक्रॉन का सब वेरिएंट BA.2 और अन्य सब वेरिएंट ही मिला है। कोई नया वेरिएंट नहीं मिला है। दिल्ली सरकार के आदेश के अनुसार, जितने भी मरीज एडमिट हो रहे हैं, हम सबकी जीनोम सिक्वेंसिंग करा रहे हैं, ताकि अगर कोई नया वेरिएंट हो तो इसका पता चल सके।
डॉक्टर सुरेश कुमार, डायरेक्टर, एलएनजेपी हॉस्पिटल
इस बारे में मैक्स साकेत के इंटरनल मेडिसिन के एक्सपर्ट डॉक्टर रोमेल टिक्कू ने कहा कि यह सही है कि लोगों का व्यवहार बदल गया है, इसलिए नए मरीजों की संख्या और संक्रमण बढ़ा है। इसकी एक वजह यह हो सकती है कि ट्रैवल बहुत बढ़ गया है, लोगों का मूवमेंट काफी हो रहा है। लेकिन, अभी तक जो स्थिति दिख रही है वह नियंत्रण में दिख रही है। संक्रमण के बाद भी हॉस्पिटल एडमिशन न के बराबर है। मरीज के लंग्स में इन्फेक्शन बहुत कम हो रहा है। ऑक्सिजन की जरूरत नहीं पड़ रही है। सीवियरिटी नहीं है। कुल मिलाकर संक्रमण के बाद भी माइल्ड असर हो रहा है। इसलिए, इसको लेकर पैनिक की स्थिति न बनाएं और न ही लापरवाह बनें। यह वायरस है और इसे हल्के में लेने की जरूरत नहीं।
रिइन्फेक्शन का खतरा तो रहता है। अगर किसी को जनवरी में संक्रमण हुआ है तो अभी दोबारा संक्रमण हो सकता है। इस प्रकार के संक्रमण में अक्सर यह देखा जा रहा है कि मरीज को बहुत माइल्ड असर करता है। नॉर्मल फीवर और जुकाम होता है। कई को तो संक्रमण का पता भी नहीं चलता।
डॉक्टर रोमेल टिक्कू, मैक्स साकेत
आकाश हॉस्पिटल के रेस्पिरेटरी डिपार्टमेंट के डॉक्टर अक्षय बुद्धराजा ने कहा कि यह सीजनल वैरिएशन की वजह से हो रहा है। जब भी सीजन चेंज होगा तो इस प्रकार का उछाल आ सकता है। यह वेव नहीं है, यह स्पाइक है। यह अभी आता रहेगा। डॉक्टर अक्षय ने कहा कि अगर किसी को कोरोना हुआ है तो 20 दिन के बाद उसे दोबारा इन्फेक्शन हो सकता है। लेकिन यह बहुत माइल्ड होता है। जब भी मौसम बदलेगा तो इस तरह का स्पाइक आएगा, अभी दो से तीन हफ्ते मामले बढ़ेगें और फिर यह कम हो जाएगा। अगला स्पाइक जब सर्दी की शुरुआत होगी तो उस समय आ सकता है।
एक नया स्पाइक दिख रहा है। हालांकि कोई नया वेरिएंट नहीं है। अभी देश में ओमिक्रॉन और इसका सब वेरिएंट ही फैल रहा है। ओमिक्रॉन के ही 4 सब वेरिएंट देश में मिले हैं। इसमें मरीज को एक दो दिन का फीवर, गले में खराश होती है। 5 से 7 दिनों में लोग ठीक हो जा रहे हैं। एडमिशन की जरूरत नहीं हो रही है, इसलिए पैनिक न हों।
डॉक्टर अक्षय बुद्धराजा, रेस्प्रेट्री एक्सपर्ट, आकाश हॉस्पिटल
उन्होंने कहा कि कोरोना एक वायरल इन्फेक्शन है। यह भी इन्फ्लूएंजा और एडिनो वायरस की तरह हो जाएगा। अभी कॉमन कोल्ड होता है तो इसकी वजह इन्फ्लूएंजा होती है। आनेवाले दिनों में कोरोना की वजह से कॉमन कोल्ड यानी सर्दी, खांसी, जुकाम और फीवर हो सकता है। एक तरह से यह मामूली फ्लू बनकर रह जाएग। जो संख्या अभी दिख रही है, उससे ज्यादा लोग संक्रमित होंगे। डोमेस्टिक ट्रैवल में जांच शुरू कर दी जाए तो नंबर दो से तीन गुना बढ़ सकते हैं। लेकिन इसकी जरूरत नहीं, क्योंकि सीवियरिटी नहीं है।




