नई दिल्ली: आखिरकार ज़ी न्यूज़ (Zee News) की मुहिम रंग लाई. साल 2019 में जुलाई के महीने में मुंबई के एक कपल को धोखे से ड्रग्स सिंडिकेट ने अपने जाल में फंसाकर हनीमून पैकेज के नाम पर कतर भेज दिया था. उन्हें एक बैग दे दिया ये कहकर कि कतर में पहुंच कर इसे किसी को देना है. वो बैग ड्रग्स से भरा हुआ था. साजिश से अनजान उस कपल को बैग में ड्रग्स के बारे में नहीं पता था. जब कपल कतर एयरपोर्ट पर पहुंचा तो उन्हें ड्रग्स के साथ गिरफ्तार कर लिया गया.
कतर पुलिस ने उनपर मामला दर्ज कर, कोर्ट में केस चलाया. दोनों पति पत्नी ओनिबा कौसर और शरीक कौसर को कतर की अदालत ने 10 साल की सजा सुनाई और जुर्माना भी लगाया था.
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इसके बाद पीड़ित परिवार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मदद की गुहार लगाई. पीएमओ से आदेश मिलने के बाद नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (Narcotics Control Bureau) ने मामले में दखल दिया. एनसीबी ने जांच शुरू की और एक एफआईआर दर्ज कर असली आरोपियों को गिरफ्तार भी कर लिया.
नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो की जांच में ये यह साफ हो गया कि दोनों पति-पत्नी निर्दोष हैं और उन्हें इस मामले में फंसाया गया है. एनसीबी की जांच में इस मामले में एक बड़े ड्रग्स सिंडिकेट का भी पर्दाफाश किया.
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इसके बाद विदेश मंत्रालय ने मामले में दखल दिया और कतर की सरकार से बातचीत की. मामला कतर की ऊपरी अदालत में पहुंचा. एनसीबी की एक टीम बाकायदा कतर गई और तमाम सबूत कोर्ट को सौंपे, जिसके बाद कतर की कोर्ट ने नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो की जांच को सही माना और ओनिबा और शरीक को बाइज्जत बरी कर दिया.
कुछ दिनों बाद दोनों वापस भारत लौट आएंगे. दोनों दोहा की जेल में बंद थे. जेल के अंदर ही ओनिबा ने एक प्यारी सी बच्ची को जन्म दिया था. ज़ी न्यूज़ ने शुरू से दोनों मासूम पति-पत्नी की रिहाई की आवाज उठाई अब आखिरकार ज़ी न्यूज़ की मुहिम रंग लाई.
















