26/11 मुंबई हमला: हाफिज सईद समेत 6 पाकिस्तानी आतंकियों पर गैर-मौजूदगी में चलेगा मुकदमा? 21 अगस्त को फैसला संभव
26/11 मुंबई आतंकी हमले के मामले में एक बड़ी प्रगति हुई है, जिसके तहत पाकिस्तान में मौजूद छह वांछित आतंकियों पर उनकी गैर-मौजूदगी में मुकदमा चलाने का रास्ता खुल सकता है। समाचार एजेंसी IANS की एक…
26/11 मुंबई आतंकी हमले के मामले में एक बड़ी प्रगति हुई है, जिसके तहत पाकिस्तान में मौजूद छह वांछित आतंकियों पर उनकी गैर-मौजूदगी में मुकदमा चलाने का रास्ता खुल सकता है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, नए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) 2023 के तहत यह अपनी तरह का पहला मामला होगा। इस मामले में विशेष सरकारी वकील उज्ज्वल निकम ने महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है।
उज्ज्वल निकम, जो अब सांसद भी हैं, ने इस कानूनी पहल का श्रेय केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को दिया। उन्होंने कहा, "देश में पहली बार पाकिस्तान में मौजूद 6 आतंकियों के खिलाफ ट्रायल चलाने की कानून के माध्यम से जो सहूलियत मिली है, उसका श्रेय गृह मंत्री अमित शाह को जाता है। मेरा मानना है कि भारत सरकार ने अच्छा काम किया है।"
कानूनी प्रक्रिया और सबूत
अभियोजन पक्ष ने अदालत से इन छह आतंकियों के खिलाफ सबूत पेश करने की अनुमति मांगी है। निकम ने बताया, "हमारी ओर से कोर्ट में दरखास्त की गई है कि जो हमारा नया कानून आया है, उसके अनुसार इन छह पाकिस्तानी आतंकियों के खिलाफ कोर्ट में सबूत पेश करने की इजाजत मिले।" इस याचिका पर अदालत ने एक प्रोक्लेमेशन ऑर्डर जारी किया है, जिसे भारत और पाकिस्तान में प्रकाशित कराने की योजना है।
इस सूची में लश्कर-ए-तैयबा के सरगना हाफिज मुहम्मद सईद, जकी-उर-रहमान लखवी और साजिद मीर जैसे बड़े नाम शामिल हैं। निकम के अनुसार, इन सभी के खिलाफ अभियोजन पक्ष के पास पुख्ता सबूत मौजूद हैं।
क्या है 26/11 का आतंकी हमला?
यह मामला 26 नवंबर, 2008 को मुंबई में हुए भीषण आतंकी हमले से जुड़ा है। पाकिस्तान से समुद्र के रास्ते आए लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों ने शहर में कई जगहों पर अंधाधुंध गोलीबारी और बम धमाके किए थे। 29 नवंबर तक चले इस हमले में 166 लोगों की जान चली गई थी और बड़ी संख्या में लोग घायल हुए थे। अब इस मामले की सुनवाई 21 अगस्त को होनी है, जब अदालत यह तय कर सकती है कि इन आरोपियों पर उनकी अनुपस्थिति में मुकदमा शुरू किया जाए या नहीं।
इनपुट: IANS



