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स्टाफ की कमी, नहीं चालू हो पा रही नई मॉर्चरी: 15 मैन पावर की जरूरत, पोस्टमॉर्टम के लिए लंबा इंतजार; दो साल पहले हैंडओवर हुई थी – Lucknow News

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स्टाफ की कमी, नहीं चालू हो पा रही नई मॉर्चरी:  15 मैन पावर की जरूरत, पोस्टमॉर्टम के लिए लंबा इंतजार; दो साल पहले हैंडओवर हुई थी – Lucknow News

स्टाफ की कमी, नहीं चालू हो पा रही नई मॉर्चरी: 15 मैन पावर की जरूरत, पोस्टमॉर्टम के लिए लंबा इंतजार; दो साल पहले हैंडओवर हुई थी – Lucknow News

लखनऊ में पोस्टमॉर्टम के लिए परिजनों को लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। कभी-कभी पूरा दिन भी बीत जाता है। इससे लोगों को राहत देने के लिए KGMU में नई मॉर्चरी बनवाई गई थी। उसे करीब 2 साल पहले 2024 में हैंडओवर भी किया जा चुका है, लेकिन अभी मॉर्चरी चालू नहीं

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दरअसल, नई मॉर्चरी को एक्टिव करने के लिए कम-से-कम 15 मैन पावर की जरूरत है। औजार सहित कई संसाधनों की जरूरत है। मार्च में स्वास्थ्य महानिदेशक तरफ से एक आदेश जारी कर कहा गया कि प्रदेश के सभी पोस्टमॉर्टम हाउस में सभी सुविधाएं जल्द से जल्द सुनिश्चित की जाएं।

आदेश के बाद जब लखनऊ के मुख्य चिकित्सा अधिकारी एनबी सिंह से पूछा गया कि नया पीएम हाउस अब तो चालू हो जाना चाहिए? इस पर उन्होंने कहा कि मॉर्चरी के संचालन के लिए लगातार मीटिंग चल रही है। जल्द ही पूरे मैन पावर और इक्विपमेंट के साथ संचालन शुरू किया जाएगा।

KGMU के न्यू एकेडमिक ब्लॉक में नया पोस्टमॉर्टम हाउस बनकर तैयार है। यह केवल मैन पावर और संसाधन न होने के चलते बंद पड़ा है।

अभी पुराने पोस्टमॉर्टम हाउस की स्थिति

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मौजूदा समय में पुराने पोस्टमॉर्टम हाउस में कुल 12 कर्मचारी कार्यरत हैं, जबकि प्रत्येक शिफ्ट में कम से कम चार कर्मचारियों की जरूरत होती है। कई बार अन्य कामों के चलते कर्मचारी वहां से हटा लिए जाते हैं, जिससे पोस्टमॉर्टम में और देर हो जाती है। समय पर पोस्टमॉर्टम न होने से शव घंटों तक पड़े रहते हैं।

पोस्टमॉर्टम के लिए बनाई गई नई मॉर्चरी में 15 कर्मचारियों की जरूरत है। इनमें फॉरेंसिक, डॉक्टर, फार्मासिस्ट, डाटा एंट्री ऑपरेटर, वीडियोग्राफर और अन्य लोगों को जरूरत है। ये सभी नियुक्तियां नए पोस्टमॉर्टम हाउस में की जानी हैं।

चालू होने के बाद 18 पोस्टमॉर्टम एक साथ होंगे

मौजूद मॉर्चरी में 6 शवों के पोस्टमॉर्टम का प्लेटफॉर्म बना है। अगर नई वाली मॉर्चरी भी चालू हो जाती है, तो 12 और नए प्लेटफॉर्म मिल जाएंगे। इस तरह कुल 18 बॉडियों के पोस्टमॉर्टम एक साथ हो सकेंगे।

मौजूदा समय में बॉडी ज्यादा होने पर पोस्टमॉर्टम रोककर प्लेटफॉर्म खाली होने का इंतजार करना पड़ता है।

KGMU में यह पुराना पोस्टमॉर्टम हाउस है।

सीएमओ और KGMU के टकराव से हो रही देर

देर होने की वजह की जानकारी करने पर पता चला कि सीएमओ दफ्तर और केजीएमयू प्रशासन के झगड़े की वजह से काम रुका है। दोनों ही एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रहे हैं। लेकिन, मैन पावर देने को कोई तैयार नहीं है। कागज तो चला दिया जाता है, लेकिन फिर सन्नाटा हो जाता है।

दो साल पहले नई मॉर्चरी हैंडओवर हुई था। लंबा समय बीतने के बाद इसके चालू न होने पर खबरें प्रकाशित की जाने लगीं तो KGMU प्रशासन ने इसे संज्ञान लिया। 24 नंवबर 2025 को मैन पावर सहित अन्य जरूरतों को पूरा करने का आदेश जारी किया गया। आदेश के बाद अब पांच महीने फिर बीत गए, लेकिन हालात नहीं बदले। पूरा मामला ठंडे बस्ते में ही है।

चिकित्सा महानिदेशक की ओर से 12 मार्च 2026 को प्रदेश के सभी मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को यह आदेश जारी किया गया था।

डिप्टी सीएम भी ले चुके संज्ञान

डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने 27 जून 2025 को एक कार्यक्रम इस मामले पर संज्ञान लिया था। उन्होंने पोस्टमॉर्टम को अधिकतम चार घंटे में करने के निर्देश दिए थे। जिसके बाद प्रदेश भर के पोस्टमॉर्टम हाउस में नई व्यवस्था लागू कर दी गई थी। शव का पोस्टमॉर्टम अधिकतम चार घंटे में करना होगा।

जिन जिलों में अधिक संख्या में पोस्टमॉर्टम हो रहे हैं। वहां सीएमओ दो या इससे अधिक डॉक्टरों की टीमें बनाकर इस संवेदनशील कार्य को संपन्न कराएं। ताकि, परिवारजनों को शव के लिए अधिक इंतजार न करना पड़े।

अब पढ़िए महानिदेशक का आदेश-

  • पोस्टमॉर्टम कार्य समय पर पूरा करने के लिए चिकित्सकों की 24×7 ड्यूटी रोस्टर बनाकर लगातार उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।
  • पोस्टमॉर्टम हाउस में मरम्मत, साफ-सफाई और परिसर की नियमित देखरेख सुनिश्चित कर काम का वातावरण व्यवस्थित रखा जाए।
  • पोस्टमॉर्टम कक्ष में मानक के अनुसार 1000 वॉट निर्बाध बिजली की व्यवस्था रखें।
  • मुख्य चिकित्सा अधिकारी सुनिश्चित करें कि पोस्टमॉर्टम गृह में किसी भी प्रकार का शुल्क मृतक परिजनों से न लिया जाए।
  • पोस्टमॉर्टम हाउस में शव-विच्छेदन की वीडियोग्राफी फ्री में कराई जाए, जिससे पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनी रहे।
  • पोस्टमॉर्टम हाउस/मॉर्चरी की खिड़की, दरवाजों की जाली और फर्श की नियमित मरम्मत कर सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
  • पोस्टमॉर्टम हाउस में उपकरण, औजार और पर्याप्त मानव संसाधन शासनादेशानुसार उपलब्ध कराए जाएं और उनका अनुपालन सुनिश्चित किया जाए।
  • मॉर्चरी में शव सुरक्षित रखने के लिए डीप-फ्रीजर नियमित चले, यह सुनिश्चित कर शव संरक्षण की व्यवस्था सुदृढ़ बनाई जाए।
  • सभी औपचारिकताओं के बाद चार घंटे के भीतर पोस्टमॉर्टम प्रक्रिया पूरी कर शव पुलिस को सौंपना सुनिश्चित किया जाए।
  • पोस्टमॉर्टम गृह में चिकित्साकर्मियों और मृतक के परिजनों के लिए बैठने की व्यवस्था, शौचालय और पेयजल सुविधा उपलब्ध कराई जाए।
  • पोस्टमॉर्टम प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद शव को गरिमापूर्ण और उचित ढंग से सील करने की कार्यवाही सुनिश्चित की जाए।
  • राजकीय चिकित्सालय में मृत्यु होने पर शव वाहन से पोस्टमॉर्टम गृह तक शव ले जाने हेतु कम से कम दो वाहन उपलब्ध कराए जाएं।

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