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‘न्यूनतम वेतन दो या मौत दो’ के नारे लगे: भोपाल में पंचायत कर्मियों ने विकास भवन के सामने नारेबाजी की, वेतन चोरी का आरोप लगाया – Bhopal News

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‘न्यूनतम वेतन दो या मौत दो’ के नारे लगे:  भोपाल में पंचायत कर्मियों ने विकास भवन के सामने नारेबाजी की, वेतन चोरी का आरोप लगाया – Bhopal News

‘न्यूनतम वेतन दो या मौत दो’ के नारे लगे: भोपाल में पंचायत कर्मियों ने विकास भवन के सामने नारेबाजी की, वेतन चोरी का आरोप लगाया – Bhopal News

विकास भवन के सामने प्रदर्शन करते पंचायत कर्मचारी।

ग्राम पंचायतों में कार्यरत चौकीदार, पंप ऑपरेटर, भृत्य और सफाईकर्मियों ने भोपाल में ग्रामीण विकास एवं पंचायत संचालनालय, विकास भवन का घेराव किया। इन कर्मचारियों ने “न्यूनतम वेतन दो या मौत दो” के नारे के साथ अपनी वर्षों पुरानी मांगों को लेकर प्रदर्शन कि

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इनका कहना है कि शासन के आदेश पर नियुक्त कर्मचारियों को ग्राम पंचायतें मात्र 2 से 3 हजार रुपए वेतन देती हैं। जबकि सरकार का आदेश निर्देश न्यूनतम 12500 रुपए वेतन देने का है। इस तरह इन कर्मचारियों के वेतन से 8 से 9 हजार रुपए महीने की चोरी हो रही है, जिसे रुकवाने और पूरा वेतन दिलाने की मांग रखी।

विकास भवन घेराव का नेतृत्व संगठन के संरक्षक डॉ. अमित सिंह, वासुदेव शर्मा, अध्यक्ष राजभान रावत, निगम मंडल अध्यक्ष अनिल वाजपेई, आउटसोर्स कर्मचारी नेता आशीष सिसोदिया, चौकीदार संघ के कार्यकारी अध्यक्ष नत्थू लाल कुशवाह ने किया। ग्राम पंचायत के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के घेराव में पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने समर्थन दिया और सरकार से न्यूनतम वेतन दिए जाने की मांग की।

वासुदेव शर्मा बोले- सरकार श्रमिकों को मुगलकाल में धकेल रही

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आउटसोर्स अस्थायी कर्मचारी मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष वासुदेव शर्मा ने कहा कि सरकार अपने ही चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों का शोषण कर रही है, उनसे 2 से 5 हजार में काम करा रही है, यह मुगलकाल जैसी स्थिति है, जब श्रमिकों से मुफ्त में काम कराकर महल, किले, मीनारें बनवाई जाती थीं, इस तरह मप्र सरकार ने श्रमिक कर्मचारी वर्ग को मुगलिया हुकूमत के दौर में धरेल दिया है, जिसके खिलाफ संघर्ष जारी है।

“न्यूनतम वेतन न देना, श्रम कानूनों को कमजोर करना और नौकरियों को ठेके पर देना, सरकार मजदूरों को अधिकारविहीन बना रही है। शर्मा ने कहा कि शासन के आदेश पर नियुक्त इन कर्मचारियों को ग्राम पंचायतें मात्र 2 से 3 हजार रुपए वेतन देती हैं, जबकि सरकार का आदेश निर्देश न्यूनतम वेतन देने का है, जो 12,500 रुपए है। इस तरह इन कर्मचारियों के वेतन से 8 से 9 हजार रुपए महीने की चोरी हो रही है, जिसे रुकवाने और पूरा वेतन दिलाने की मांग रखी।

पंचायत चौकीदार संघ के संयोजक डॉ. अमित सिंह ने कहा कि “पेयजल, सुरक्षा, स्वच्छता, भवन संचालन, ग्राम पंचायत की पूरी जिम्मेदारी हम निभाते हैं, पर मानदेय और स्थायित्व दोनों नहीं हैं।

कर्मचारियों की प्रमुख मांगें

  • सरकार द्वारा निर्धारित ₹ 12,500 मासिक न्यूनतम वेतन कर्मचारियों को तत्काल दिया जाए। वर्तमान में पंचायतें मात्र ₹2,000–₹3,000 दे रही हैं, जो प्रतिमाह ₹8,000–₹9,000 की सीधी वेतन चोरी है।
  • ग्राम पंचायतों में कार्यरत सभी कर्मचारियों को चतुर्थ श्रेणी का पदनाम देकर नियमितीकरण, भविष्य निधि (EPF), ईएसआई, अवकाश नियम,वार्षिक वेतनवृद्धि जैसी समस्त वैधानिक सुविधाएं लागू की जाएं।
  • नियुक्ति से लेकर सेवानिवृत्ति तक की प्रक्रिया स्पष्ट रूप से विनियमित की जाए। भर्ती, स्थानांतरण, समयपालन, कर्तव्य और अनुशासन संबंधी स्पष्ट सेवा नियम बनाए जाएं।
  • कार्यस्थल पर सुरक्षा एवं सामाजिक सुरक्षा,कर्मचारियों को दुर्घटना बीमा, जीवन बीमा, स्वास्थ्य सुरक्षा, समय पर वेतन भुगतान की सुविधाएं तत्काल प्रदान की जाएं।
  • मनरेगा को कमजोर करने वाली नीतियों पर रोक लगाई जाए और ग्रामीण श्रमिकों को रोजगार की निरंतरता दी जाए।

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