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दुनिया का एकमात्र ध्रुपद मेला तुलसी घाट पर शुरू: स्पेशल वीजा पर आते हैं श्रोता और कलाकार,5 दिनों तक होगा आयोजन – Varanasi News

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दुनिया का एकमात्र ध्रुपद मेला तुलसी घाट पर शुरू:  स्पेशल वीजा पर आते हैं श्रोता और कलाकार,5 दिनों तक होगा आयोजन – Varanasi News

दुनिया का एकमात्र ध्रुपद मेला तुलसी घाट पर शुरू: स्पेशल वीजा पर आते हैं श्रोता और कलाकार,5 दिनों तक होगा आयोजन – Varanasi News


दुनिया के एकमात्र ध्रुपद मेले की शुरुआत वाराणसी में हो चुकी है। यह तीन रात लगातार चलेगा। इसमें आने वाले 50-60 प्रतिशत श्रोता विदेशी हैं। यही ट्रेंड पिछले 52 सालों से चला आ रहा है। 52वें अंतरराष्ट्रीय ध्रुपद मेला की शुरुआत तुलसीघाट पर आयोजित हुई। ध्रुपद तीर्थ के रूप में विख्यात हो चुके तुलसीघाट पर आयोजन की पहली निशा में वैदिक मंत्रों के जाप से उपजी इस शैली के साधक एक-एक कर मंच को गरिमामय करते रहे और सामने चुनिंदा ही सही लेकिन शास्त्रीय संगीत के आरोह-अवरोध में डूबने को व्याकुल रसिक श्रोता धन्य होते रहे। अब जानिए आज किसकी प्रस्तुति रही डा. आशीष जायसवाल गायन,पं. रविन्द्र नारायण गोस्वामी सुरबहार, प्रशान्त मलिक ने गायन,निशांत मलिक के गायन ने अपनी प्रस्तुति दी। इस दौरान कार्यक्रम में वर्तमान राजकुमार राजा अनंत नारायण सिंह और संकटमोचन मंदिर के महंत प्रोफेसर विश्वंभर नाथ मिश्र भी मौजूद रहे। अब जानिए पहले दिन किसकी रही प्रस्तुति महाराज बनारस विद्या न्यास की ओर से पांच दिनी आयोजन के पहली निशा की प्रथम प्रस्तुति काशी के ख्यात कलाकार पं.देवव्रत मिश्र के सुरबहार वादन की रही। वादन का आरंभ उन्होंने राग वाचस्पति में आलाप से किया। इसके बाद चौताल और सूल ताल में निबद्ध रचनाओं का वादन किया। उनके साथ पखावज पर वैभव रामदास एवं तानपूरा पर बेल्जियम के सेपे ने संगत की। पद्मश्री प्रो.ऋत्विक सान्याल ने राग मारवा की अवधारणा की। ध्रुपद के चलन के अनुसार उन्होंने राग को विस्तार दिया। गायन के दौरान आलापचारी और तानों ने श्रोताओं को अपनी ओर आकर्षित किया। चौथी प्रस्तुति लेकर कोलकाता के पं. विशोक शील मंचासीन हुए। ध्रुपद मेले का शुभारंभ 1975 में हुआ महंत प्रोफेसर मिश्रा ने कहा- ध्रुपद मेले का शुभारंभ 1975 में हुआ था। पहली बार इस उत्सव की शुरुआत में केंद्रीय संगीत नाटक अकादमी संस्कृति मंत्रालय ने आर्थिक मदद की थी। दूसरी बार महाराजा काशी नरेश डॉ. विभूति नारायण सिंह ने आर्थिक मदद से आयोजन हुआ। इसकी प्रसिद्धि बढ़ने के साथ ये राष्ट्रीय से अंतरराष्ट्रीय मंच बन गया। आज इस मंच से देशी-विदेशी कलाकार हाजिरी लगा रहे हैं। ध्रुपद मेला के 52 वर्षो की यात्रा में में तीन से चार पीढ़ी के कलाकार अपनी प्रस्तुतियों से सुधिजनों को आनंदित कर रहे हैं। पहले ध्रुपद मेले का उद्घाटन संकट मोचन मंदिर के पूर्व महंत प्रो. वीरभद्र मिश्र ने किया था।

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