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केंद्रीय कैबिनेट ने नई रेल लाइन को मंजूरी दी: एमपी-यूपी और राजस्थान को फायदा, नागदा-मथुरा के बीच अतिरिक्त तीसरी और चौथी नई लाइन बिछाने 16,403 करोड़ की मंजूरी – Indore News

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केंद्रीय कैबिनेट ने नई रेल लाइन को मंजूरी दी:  एमपी-यूपी और राजस्थान को फायदा, नागदा-मथुरा के बीच अतिरिक्त तीसरी और चौथी नई लाइन बिछाने 16,403 करोड़ की मंजूरी – Indore News

केंद्रीय कैबिनेट ने नई रेल लाइन को मंजूरी दी: एमपी-यूपी और राजस्थान को फायदा, नागदा-मथुरा के बीच अतिरिक्त तीसरी और चौथी नई लाइन बिछाने 16,403 करोड़ की मंजूरी – Indore News

केंद्रीय कैबिनेट ने एमपी के नागदा जंक्शन से मथुरा के बीच अतिरिक्त तीसरी और चौथी नई रेल लाइन बिछाने को मंजूरी दी है। इसके निर्माण में 16,403 करोड़ की लागत आएगी। केंद्र सरकार ने दिल्ली-मुंबई व्यस्त रूट पर यातायात कम करने के लिए नागदा-मथुरा के बीच तीसरी

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करीब 16,403 करोड़ रुपए की लागत से प्रस्तावित यह परियोजना लगभग 568 किलोमीटर लंबी है, जो मध्य प्रदेश के नागदा से उत्तर प्रदेश के मथुरा से कोटा और राजस्थान के भरतपुर के रास्ते होकर गुजरेगी। इस रूट पर मौजूदा समय में ट्रेनों का दबाव काफी अधिक है, जिसके चलते यात्रियों को अक्सर देरी का सामना करना पड़ता है। नई लाइनें बिछने के बाद ट्रैफिक का बोझ कम होगा और ट्रेनों की आवाजाही अधिक सुगम हो सकेगी।

यह रेल खंड ‘स्वर्ण चतुर्भुज’ के दिल्ली-मुंबई रूट का हिस्सा है। वर्तमान में यहां लाइनों पर क्षमता से अधिक बोझ है। फिलहाल यहां दो लाइनें हैं जिन पर पैसेंजर और मालगाड़ियों का भारी दबाव रहता है। तीसरी और चौथी लाइन बनने से मालगाड़ियों और सुपरफास्ट ट्रेनों के लिए अलग ट्रैक मिल सकेगा। भीड़ कम होने से ट्रेनों की औसत गति बढ़ेगी और दिल्ली-मुंबई के बीच का यात्रा समय कम होगा।

इस परियोजना से लगभग 4,161 गांवों और 83 लाख की आबादी को सीधा लाभ मिलेगा। इस रूट से कोयला, सीमेंट, खाद्यान्न और पेट्रोलियम उत्पादों की ढुलाई बहुत आसान हो जाएगी। सालाना लगभग 60 MTPA (मिलियन टन प्रति वर्ष) अतिरिक्त माल ढोने की क्षमता विकसित होगी। रेलवे परिवहन का सबसे स्वच्छ माध्यम है। इस प्रोजेक्ट से डीजल की खपत कम होगी और कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी (अनुमानित 37 करोड़ लीटर तेल की बचत)।

प्रोजेक्ट फैक्ट फाइल

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• कुल लंबाई: नागदा-मथुरा के बीच लगभग 550 किलोमीटर (अनुमानित) की नई रेल लाइनें बिछाई जाएंगी।

• कुल निवेश: इस रूट के लिए कुल ₹16,403 करोड़, वहीं (कैबिनेट ने कुल ₹23,437 करोड़ की तीन परियोजनाओं को मंजूरी दी है)।

• समय सीमा: सरकार ने इसे 2030-31 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है।

• क्षेत्र: यह लाइन 3 राज्यों- मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश से होकर गुजरेगी।

इसके दायरे में आने वाले मुख्य स्टेशन और पर्यटन स्थल

• धार्मिक पर्यटन: मथुरा-वृंदावन (UP) और उज्जैन का महाकालेश्वर मंदिर (MP)।

• वन्यजीव पर्यटन: रणथंभौर नेशनल पार्क (सवाई माधोपुर, राजस्थान), केवलादेव नेशनल पार्क (भरतपुर) और कूनो नेशनल पार्क।

• प्रमुख शहर: नागदा, शामगढ़, कोटा, सवाई माधोपुर, गंगापुर सिटी, भरतपुर और मथुरा।

भरतपुर के लिए गेम चेंजर होगी परियोजना

जिले के कृषि उत्पाद, पत्थर उद्योग और डेयरी सेक्टर को तेज व सस्ता परिवहन मिलेगा, जिससे व्यापारिक गतिविधियों में इजाफा होगा। केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान आने वाले पर्यटकों के लिए बेहतर रेल कनेक्टिविटी से पर्यटन को नई रफ्तार मिलेगी। निर्माण के दौरान स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ेगा, जबकि प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद रेलवे संचालन, रखरखाव और लॉजिस्टिक्स से जुड़े नए अवसर भी पैदा होंगे। गजट अधिसूचना के बाद प्रक्रियाएं सरल होने से देरी की संभावना भी कम मानी जा रही है।

मथुरा-नागदा प्रोजेक्ट से यूपी को क्या लाभ

उत्तर प्रदेश के लिहाज से यह परियोजना कई मायनों में गेम चेंजर साबित होने जा रही है। मथुरा और आसपास के क्षेत्रों में रेल कनेक्टिविटी बेहतर होने से पर्यटन को नई गति मिलेगी। खासतौर पर धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों तक पहुंच आसान होने से देश-विदेश से आने वाले यात्रियों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है। इसके साथ ही भरतपुर और आसपास के इलाकों में स्थित केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान जैसे पर्यटन स्थल भी बेहतर रेल संपर्क का लाभ उठाएंगे।

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