यूक्रेनी सेना का रूस के भीतर 400 किलोमीटर दूर तक हमला, तेल डिपो और सैन्य ठिकाने बने निशाना
यूक्रेन के राष्ट्रपति व्लोदिमीर जेलेंस्की ने रूस के भीतर लंबी दूरी तक सफल सैन्य कार्रवाई का दावा किया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, जेलेंस्की ने बताया कि यूक्रेनी बलों ने देश की सीमा…
यूक्रेन के राष्ट्रपति व्लोदिमीर जेलेंस्की ने रूस के भीतर लंबी दूरी तक सफल सैन्य कार्रवाई का दावा किया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, जेलेंस्की ने बताया कि यूक्रेनी बलों ने देश की सीमा से 400 किलोमीटर से भी अधिक दूर स्थित रूस के महत्वपूर्ण सैन्य और लॉजिस्टिक्स ठिकानों पर हमला किया है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर जारी एक पोस्ट में राष्ट्रपति जेलेंस्की ने कहा, "मॉस्को क्षेत्र में हमारी लंबी दूरी की कार्रवाई और प्रतिबंधों का असर दिखा है। दुश्मन के लॉजिस्टिक्स केंद्रों और एक तेल भंडार (ऑयल डिपो) को निशाना बनाया गया।" इस सफल अभियान के लिए उन्होंने अपनी सेना की विभिन्न इकाइयों की सराहना की। उन्होंने कहा, "इसके लिए मैं हमारी अनमैन्ड सिस्टम्स फोर्सेज, खुफिया एजेंसियों, मिसाइल और आर्टिलरी बलों, और स्पेशल ऑपरेशंस फोर्सेज के जवानों का धन्यवाद करता हूं।"
जवाब में ड्रोन हमले का दावा
यूक्रेन का यह दावा ऐसे समय में आया है जब रूसी अधिकारियों ने मॉस्को क्षेत्र पर यूक्रेनी ड्रोन हमले की जानकारी दी। मॉस्को के गवर्नर आंद्रे वोरोब्योव ने टेलीग्राम पर बताया कि रविवार रात रूसी एयर डिफेंस ने दो ड्रोनों को मार गिराया। एक ड्रोन ओडिन्त्सोवो शहरी जिले के चासत्सी इलाके में, जबकि दूसरा क्रास्नोगोर्स्क के पावशिन्स्काया पोयमा में गिरा। गवर्नर के मुताबिक, इन घटनाओं में किसी नागरिक के घायल होने की खबर नहीं है, लेकिन एक बहुमंजिला इमारत की खिड़कियों के शीशे टूट गए और कई गाड़ियों को नुकसान पहुँचा।
काला सागर में भी कार्रवाई
जेलेंस्की ने अपनी पोस्ट में यह भी बताया कि ज़मीनी ठिकानों के अलावा काला सागर में भी कार्रवाई की गई। उनके अनुसार, रूस के तथाकथित 'शैडो फ्लीट' के दो टैंकरों और चार मालवाहक जहाजों को भी निशाना बनाया गया। राष्ट्रपति ने जोर देकर कहा कि रूस के हर हमले का उचित जवाब दिया जाएगा। उन्होंने कहा, "रूस हमारे शहरों और बस्तियों पर जो भी हमला करता है, उसका हम हर बार उचित जवाब दे रहे हैं। यह युद्ध खत्म होना चाहिए। यह तभी संभव है, जब इस युद्ध की एकमात्र वजह रूस पर दबाव और बढ़ाया जाए।"
इनपुट: IANS



