बांग्लादेश: जमात से गठबंधन के बाद NCP की अपनी पहचान पर क्यों उठ रहे हैं सवाल?
बांग्लादेश में छात्र आंदोलन से जन्मी नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) के भविष्य और उसकी राजनीतिक पहचान पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इसका मुख्य कारण पार्टी का…
बांग्लादेश में छात्र आंदोलन से जन्मी नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) के भविष्य और उसकी राजनीतिक पहचान पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इसका मुख्य कारण पार्टी का जमात-ए-इस्लामी (जेआई) के नेतृत्व वाले गठबंधन में शामिल होना है, जिसे लेकर पार्टी के भीतर और बाहर दोनों जगह चिंता जताई जा रही है। जमात-ए-इस्लामी का इतिहास 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के विरोध और पाकिस्तानी सेना का समर्थन करने का रहा है, जिसके चलते NCP को इस गठबंधन की बड़ी राजनीतिक कीमत चुकानी पड़ रही है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि इस साल फरवरी में अपनी पहली वर्षगांठ तक NCP के कम से कम 60 नेता और कार्यकर्ता पार्टी छोड़ चुके थे। जमात के साथ चुनावी गठबंधन को पार्टी की राजनीतिक दिशा को लेकर चल रहे आंतरिक मतभेदों का सबसे बड़ा कारण माना जा रहा है।
सड़कों से संसद तक जमात का साथ
NCP और जमात की यह साझेदारी सिर्फ चुनावी नहीं, बल्कि चुनाव के बाद भी जारी रही। जमात प्रमुख शफीकुर रहमान विपक्ष के नेता बने, जबकि NCP संयोजक नाहिद इस्लाम ने विपक्ष के मुख्य सचेतक का पद संभाला। रिपोर्ट के अनुसार, अब यह एक आम तस्वीर बन गई है कि NCP, जमात के साथ लॉन्ग मार्च, गठबंधन की बैठकों और संसद के विरोध-प्रदर्शनों में नियमित रूप से शामिल होती है।
इसका एक उदाहरण 19 सितंबर को दिखा, जब जमात के नेतृत्व वाले 11 दलों के विपक्षी गठबंधन के लॉन्ग मार्च में NCP संयोजक नाहिद इस्लाम ने प्रधानमंत्री तारिक रहमान पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, "उन्हें यह तय करना होगा कि वह हेलीकॉप्टर से देश छोड़कर भागेंगे या सम्मान के साथ इस्तीफा देंगे।" यह बयान उन्होंने NCP की अपनी रैली में नहीं, बल्कि जमात के मंच से दिया था। 'द डिप्लोमैट' की रिपोर्ट के अनुसार, यह लॉन्ग मार्च सात सूत्रीय मांगों को लेकर आयोजित किया गया था, जिसमें फरवरी के जनमत संग्रह के फैसले को लागू करना और बढ़ती महंगाई पर नियंत्रण जैसी मांगें शामिल थीं।
क्या है NCP की अपनी पहचान?
अगस्त 2024 में अवामी लीग सरकार के पतन का कारण बने छात्र आंदोलन से उभरी NCP ने एक नए राजनीतिक विकल्प का वादा किया था। हालांकि, रिपोर्ट में सवाल उठाया गया है कि अब NCP में ऐसा क्या है जो उसे जमात से अलग बनाता है? पार्टी का तर्क है कि जमात के साथ उसका रिश्ता वैचारिक नहीं, बल्कि रणनीतिक है।
इसके बावजूद, विश्लेषकों का मानना है कि मतदाताओं के सामने अपनी एक अलग राजनीतिक पहचान साबित करना पार्टी के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। रिपोर्ट के अनुसार, मतदाता किसी पार्टी की पहचान सिर्फ उसके संविधान या आधिकारिक बयानों से नहीं करते, बल्कि वे यह भी देखते हैं कि पार्टी किन दलों के साथ मंच साझा करती है, संसद में किसके साथ काम करती है और सड़कों पर किनके साथ अभियान चलाती है। जमात के साथ लगातार दिखने से NCP की स्वतंत्र पहचान को लेकर सवाल और गहरे होते जा रहे हैं।
इनपुट: IANS



