यूपी: 31 हजार से ज्यादा OBC युवाओं को मिल रहा है मुफ्त कंप्यूटर प्रशिक्षण, जानिए योजना की पूरी जानकारी
उत्तर प्रदेश में आर्थिक रूप से कमजोर अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के हजारों युवाओं को तकनीकी रूप से कुशल बनाने के लिए सरकार की एक विशेष योजना चल रही है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, इस पहल के तहत इस वर्ष…
उत्तर प्रदेश में आर्थिक रूप से कमजोर अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के हजारों युवाओं को तकनीकी रूप से कुशल बनाने के लिए सरकार की एक विशेष योजना चल रही है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, इस पहल के तहत इस वर्ष 31,000 से ज्यादा युवक-युवतियों को 'ओ-लेवल' और 'सीसीसी' जैसे कंप्यूटर कोर्स का मुफ्त प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिसकी कक्षाएं 11 अगस्त से शुरू हो चुकी हैं।
इस योजना का मुख्य उद्देश्य युवाओं को आधुनिक डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिए तैयार करना और उनके लिए रोजगार के अवसर बढ़ाना है। पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग द्वारा संचालित इस योजना के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 में 40 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है।
कौन और कैसे उठा सकता है लाभ?
यह प्रशिक्षण पूरी तरह से निःशुल्क है और इसका लाभ उठाने के लिए कुछ पात्रता शर्तें तय की गई हैं:
- आवेदक उत्तर प्रदेश का निवासी और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) से होना चाहिए।
- न्यूनतम शैक्षिक योग्यता इंटरमीडिएट (12वीं पास) या उससे अधिक हो।
- आवेदक के अभिभावक की कुल वार्षिक आय एक लाख रुपये या उससे कम होनी चाहिए।
इस वर्ष (2026-27 के लिए) योजना के तहत 70 हजार से अधिक आवेदन प्राप्त हुए थे, जिनमें से 31,602 युवाओं का चयन किया गया है। इनमें से 24,240 प्रशिक्षु 'ओ-लेवल' और 7,362 'सीसीसी' कोर्स कर रहे हैं।
प्रशिक्षण और खर्च की व्यवस्था
यह प्रशिक्षण भारत सरकार के राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक एवं सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (NIELIT) से मान्यता प्राप्त केंद्रों के माध्यम से दिया जाता है। पूरे प्रदेश में ऐसे 338 संस्थान इस योजना से जुड़े हैं, ताकि युवाओं को अपने घर के पास ही प्रशिक्षण की सुविधा मिल सके।
प्रशिक्षण का पूरा खर्च सरकार उठाती है। पिछड़ा वर्ग कल्याण निदेशक उमेश प्रताप सिंह ने बताया, "सरकार का उद्देश्य युवाओं को डिजिटल ज्ञान और रोजगारपरक कौशल उपलब्ध कराकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है।" योजना के तहत सरकार प्रति छात्र ओ-लेवल कोर्स के लिए 15,000 रुपये और सीसीसी कोर्स के लिए 3,500 रुपये तक का भुगतान सीधे प्रशिक्षण संस्थानों को करती है, जिससे छात्रों पर कोई आर्थिक बोझ नहीं पड़ता।
इनपुट: IANS



