चीन-अमेरिका संबंध: शी जिनपिंग और डोनाल्ड ट्रंप ने 'रचनात्मक रणनीतिक स्थिरता' पर जताई सहमति
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस में एक चाय-परिचर्चा के दौरान दोनों देशों के बीच संबंधों को एक नई दिशा देने पर सहमति जताई है। समाचार एजेंसी IANS के…
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस में एक चाय-परिचर्चा के दौरान दोनों देशों के बीच संबंधों को एक नई दिशा देने पर सहमति जताई है। समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, दोनों नेताओं ने 'सम्मान, निष्पक्षता और पारस्परिकता पर आधारित रचनात्मक रणनीतिक स्थिरता संबंध' स्थापित करने का संकल्प लिया। इस मुलाकात में दोनों नेताओं की पत्नियां, फंग लियुआन और मेलानिया ट्रंप भी मौजूद थीं।
राष्ट्रपति जिनपिंग ने इस राजकीय यात्रा को 11 वर्षों में वाशिंगटन की अपनी पहली यात्रा बताते हुए कहा कि इसमें चीन-अमेरिका संबंधों की परिभाषा को और समृद्ध किया गया है। उन्होंने कहा, "व्यापार और आर्थिक क्षेत्र में भी पारस्परिक लाभकारी परिणाम प्राप्त हुए हैं, जिनका दोनों देशों की जनता और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय द्वारा स्वागत किया जाएगा।" जिनपिंग ने इस बात पर भी जोर दिया कि चीन-अमेरिका संबंधों का भविष्य उज्ज्वल है, हालांकि यह मार्ग कठिनाइयों और चुनौतियों से भरा हो सकता है।
सकारात्मक परिणामों पर दोनों नेताओं का जोर
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शी जिनपिंग की यात्रा को रचनात्मक और अत्यंत सफल बताया। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों ने अमेरिका-चीन संबंधों और प्रमुख अंतरराष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय मुद्दों पर गहन चर्चा की, जिससे कई सकारात्मक परिणाम निकले जो दोनों देशों के लिए लाभकारी हैं। ट्रंप ने भविष्य में भी राष्ट्रपति शी के साथ घनिष्ठ संवाद बनाए रखने की इच्छा व्यक्त की।
अपनी ओर से, शी जिनपिंग ने राष्ट्रपति ट्रंप के साथ मिलकर इतिहास के प्रति जिम्मेदारी के साथ काम करने और चीन-अमेरिका संबंधों के विकास में एक महत्वपूर्ण अध्याय लिखने की अपनी तत्परता व्यक्त की।
सांस्कृतिक आदान-प्रदान और आपसी समझ
चाय-परिचर्चा के बाद, दोनों राष्ट्राध्यक्ष अपनी पत्नियों के साथ अमेरिकी राष्ट्रीय अभिलेखागार गए। वहां उन्होंने अभिलेखागार और उसकी प्रमुख प्रदर्शनियों के बारे में जानकारी ली। इस अवसर पर शी जिनपिंग ने कहा कि दोनों देशों के इतिहास, संस्कृति और सामाजिक व्यवस्था भिन्न हो सकती है, लेकिन दोनों देशों के लोगों की बेहतर जीवन की आकांक्षाएं समान हैं। उन्होंने आपसी मतभेदों को स्वीकार करने, एक-दूसरे को समझने और सहयोग बढ़ाने पर बल दिया, ताकि दोनों देशों के संबंध स्थिर और दूरगामी हो सकें।
इनपुट: IANS



