भारत के इतिहास में ईसा पूर्व और ईसा बाद क्यों कहा जाता है ?
भारत के इतिहास की कोई भी पुस्तक पढ़ते हुए आपके सामने कई बार ईसा पूर्व और ईसा बाद ये शब्द जरूर आएं होगें. इनका अर्थ बिल्कुल साधारण होता है.
भारत के इतिहास की कोई भी पुस्तक पढ़ते हुए आपके सामने कई बार ईसा पूर्व और ईसा बाद ये शब्द जरूर आएं होगें. इनका अर्थ बिल्कुल साधारण होता है. लेकिन यदि हम इनमें अंतर नहीं कर पाते तो यह हमारे इतिहास को पढ़ने को व्यर्थ बना देता है. ये शब्द दिखने में एक जैसे ही लगते हैं. लेकिन इनसे तिथि बहुत प्रभावित होती है.

ग्रेगोरियन कैलेंडर में ईसा बाद , ईसा मसीह के जन्म के बाद के वर्षों को दर्शाता है और ईसा पूर्व (ई.पू.) उनके जन्म से पूर्व के वर्षों को दर्शाता है. अगर इसको अच्छे से समझने के लिए हम उदाहरण ले तो जैसें- 20 ईसा बाद का मतलब है ईसा के जन्म से 20 साल बाद का समय अगर हम बात करें 20 ईसा पूर्व तो इसका मतलब है होता है कि जब ईसा का जन्म हुआ उसके 20 साल पहले का समय.

उदाहरण: चंद्रगुप्त मौर्य का जन्म 345 ईसा पूर्व हुआ था तथा मृत्यु 297 ईसा पूर्व में हुआ इसका मतलब 345 साल पहले जन्म लिए 297 वर्ष पहले मृत्यु हुई वह कुल उम्र 48 वर्ष हुई. आजकल ईसा बाद की जगह कॉमन एरा (सी.ई अथवा CE) और ईसा पूर्व की जगह "बिफ़ोर कॉमन एरा" (बी.सी.ई या BCE) का प्रयोग सामान्य हो गया है. वर्तमान समय में इन्ही शब्दों का ज्यादा प्रयोग किया जाता है.
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इतिहास को बेहतर तरीके से पढ़ने के लिए इन शब्दों को हमें अच्छे से समझना जरूरी है. 1000 ईसा पूर्व और 1000 ईसा बाद के समय के बीच में 2000 साल का फर्क होता है. इसको समझे बिना हम इतिहास का कालक्रम का सही तरीके से अध्यन नहीं कर पाएंगें. अगर किसी का जन्म 500 ईसा. पूर्व हुआ और मृत्यु 457 ईसा पूर्व तो हम यहीं सोचते रहेंगें कि 500 में जन्म और 457 में मृत्यु कैसे हो सकती है. इसी कारण इन शब्दों को अच्छे से समझना चाहिएं.



