जानियें, कहाँ लांच होगा इंदिरा-कैंटिन?

जानियें, कहाँ लांच होगा इंदिरा-कैंटिन?
जानियें, कहाँ लांच होगा इंदिरा-कैंटिन?

हमारे देश की गंभीर समस्याओं में से एक समस्या है भूख! भूख से मरने वालों की संख्या में इजाफा होता ही जा रहा है। आपने अक्सर बस-स्टॉप, रेलवे-स्टेशन, सड़कों आदि जगहों पर भूख से पीड़ित लोगों को देखा ही होगा? देश की अर्थव्यवस्था लगातार बढ़ रही है, लेकिन ऐसे में सवाल यह खड़ा होता है कि आजादी के इतने सालों बाद भी देश में भूखमरी की समस्या क्यों बरकार है? क्या वाकई इस समस्या से उबरने के लिए देश के पास कोई समाधान नहीं है? आज भी देश में हजारों-लाखों की संख्या में लोग है, जिन्हें दो वक्त की रोटी भी नसीब नहीं होती है। देश में गरीबों की संख्या भी ज्यादा है, मंहगा खाना वह खा नहीं पाते है, ऐसे में देश की प्रदेश सरकार अपने-अपने स्तर पर काम तो कर रही है, लेकिन समस्या का समाधान जड़ से नहीं हो पा रहा है।

देश के स्मार्ट सिटी में से एक कर्नाटक है, कर्नाटक सरकार ने प्रदेश को भूख से बचाने के लिए एक कदम उठाया है। हालांकि यह कदम पहली बार किसी सरकार द्वारा नहीं उठाया गया है लेकिन कर्नाटक में यह पहली बार होगा। जी हाँ, कर्नाटक को भूख से बचाने और श्रमिक वर्ग, गरीब प्रवासियों को सस्ती दरों पर भोजन मुहैया कराने के लिए मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने मंगलवार को घोषणा की है कि राज्य सरकार बुधवार से समूचे बंगलुरु में इंदिरा कैंटीन शुरू करेगी। खबर के मुताबिक इस योजना की लॉन्चिंग कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी करेंगे। उन्होंने स्वतंत्रता दिवस पर अपने संबोधन में कहा कि मुझे यह घोषणा करने में खुशी हो रही है कि बुधवार से बेंगलुरु में इंदिरा कैंटीन खुलने जा रही है, जहां हर दिन शहर के श्रमिक और गरीब प्रवासी सस्ते में भोजन करेंगे। आपको बता दें कि इंदिरा कैंटीन में लोगों को महज 10 रुपए में भरपेट खाना मिलेगा। शुरुआत में 101 कैंटीन खोले जाएंगे, जहां हर दिन 5 रुपये में शाकाहारी नाश्ता और 10 रुपये में दोपहर का खाना और रात का खाना मुहैया कराएंगे।

इस योजना को खोलने के लिए प्रदेश सरकार ने काफी खर्चा किया है। खबर के मुताबिक, मुख्यमंत्री के पास ही वित्त मंत्रालय है, उन्होंने चालू वित्त वर्ष (2017-18) में सभी 198 वार्डों में पड़ोसी राज्य तमिलनाडु की अम्मा कैंटीन की तर्ज पर कैंटीन चलाने के लिए बजट में प्रावधान किया है। साथ ही कर्नाटक के सीएम ने कहा कि हमारा लक्ष्य कर्नाटक को भूख मुक्त बनाना है। साथ ही राज्य में हर महीने गरीबी रेखा से नीचे के लोगों को ‘अन्न भाग्य योजना’ के तहत 7 किलोग्राम चावल मुफ्त में दिया जा रहा है, ताकि वे दो वक्त का खाना खा सकें।

बहरहाल, कर्नाटक सरकार का यह फैसला सराहनीय है, इससे पहले तमिलनाडु में अम्मा कैंटीन के तहत इस तरह का प्रावधान है। हालांकि इस तरह के प्रावधान देश के सभी राज्यों में किया जाना चाहिए, जिससे भारत को भूख मुक्त बनाने में थोड़ी मदद मिल सकें।