जानिए कब है दिवाली और क्या है लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त?

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जानिए कब है दिवाली और क्या है लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त?

दिवाली का त्योहार इस साल 14 नवंबर को मनाया जाएगा। दिवाली का त्योहार हर तरफ अंधकार को मिटाकर उजाला करने का होता है। दिवाली पर हर तरफ रोशनी ही रोशनी नजर आती है। ब्रह्म पुराण के अनुसार कार्तिक मास की अमावस्या तिथि की मध्यरात्रि को मां लक्ष्मी पृथ्वी में आती हैं और अपने भक्तों को आर्शीवाद देती है। यानी जिस दिन प्रदोष काल में मध्यरात्रि अमावस्या के साथ निशीथ काल है उस दिन ही दिवाली का पर्व मनाया जाएगा। इसलिए 14 नवंबर को दिवाली मनाई जाएगी।

आज के समय में लोग दीपों से ज्यादा लाइट को महत्व देते हैं, लेकिन परंपरगत रूप से दिवाली की रात में तेल और घी के दीपक ही जलाना शुभ माना जाता है। धनतेरस के दिन से ही दीपक जलाना आरंभ कर दिया जाता है। दिवाली वाले दिन लक्ष्मी पूजन के पश्चात घरों में घी या तेल के बहुत सारे दिए जलाकर प्रकाश करने की परंपरा है। दिवाली पर दिए जालने का धार्मिक ही नहीं वैज्ञानिक महत्व भी है।

दीपावली शब्द का अर्थ है दीपों की श्रृंखला, जिसके कारण दिवाली को रोशनी के त्योहार के रूप में भी जाना जाता है। दिवाली अंधकार पर प्रकाश की विजय का प्रतीक है, बुराई पर अच्छाई की विजय का चित्रण करती है।लक्ष्मी पूजा, दिवाली के सबसे भव्य पहलुओं में से एक है। इस शुभ दिन पर, देवी लक्ष्मी, भगवान गणेश और मां सरस्वती शाम और रात के दौरान पूजनीय हैं। पुराणों के अनुसार, देवी लक्ष्मी पृथ्वी पर उतरती हैं, और हर घर का दौरा करती हैं।

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इसलिए कहा जाता है कि घर की उचित सफाई और रोशनी इस उचित समय पर की जानी चाहिए ताकि देवी लक्ष्मी प्रसन्न हों। दिवाली पूजा करते समय इन बातों खा ध्यान रखना चाहिए।कार्तिक की अमावस्या पर, भगवान राम राक्षस राजा रावण को हराने और अपने 14 साल के वनवास को पूरा करने के बाद, अपने राज्य अयोध्या लौटे थे। अयोध्या के लोगों ने अपने प्यारे राजा का स्वागत अपने घरों को मिट्टी के दीयों और मोमबत्तियों से रोशन करके किया था।

अगर बात की जाए दिवाली की शुभ महूरत की तो इस दिन लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5 बजकर, 30 मिनट से लेकर शाम 7 बजकर, 25 मिनट तक रहेगा. इसके अलावा प्रदोष काल मुहूर्त शाम 5 बजकर, 27 मिनट से लेकर रात 8 बजकर, 6 मिनट तक होगा. साथ ही वृषभ काल मुहूर्त शाम 5 बजकर, 30 मिनट से लेकर शाम 7 बजकर, 25 मिनट तक रहेगा.

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लक्ष्मी-गणेश की पूजा के लिए इस्तेमाल होने वाली सामग्री की बात करें तो कलश, अक्षत, कुमकुम, नारियल, नए कपड़े, मिठाई, दीए, चांदी के सिक्के, चावल आदि सामग्रियों की ज़रूरत पड़ती है. मान्यता है कि इस दिन मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा करने से रिद्धि-सिद्धि की प्राप्ति होती है.

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