शनिवार, 22 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
Breaking News Hindi

सावन महीने की एकादशी की कहानी क्या है ?

हिंदू धर्म बहुत प्राचीन धर्म हैं. जिसमें एकादशी का विशेष महत्व होता है आमतौर पर प्रत्येक वर्ष 24 एकादशी आती है.

सावन महीने की एकादशी की कहानी क्या है ?

हिंदू धर्म बहुत प्राचीन धर्म हैं. जिसमें एकादशी का विशेष महत्व होता है आमतौर पर प्रत्येक वर्ष 24 एकादशी आती है. लेकिन जब अधिकमास आता है तब वर्ष में 26 एकादशी आती हैं. सावन महीने की एकादशी का विशेष महत्व होता है. सावन महीने की कृष्ण एकादशी को कामिका नाम से जाना जाता है. ऐसी भी मान्यता है कि कामिका की कहानी सुनने मात्र से वायपेय यज्ञ के बराबर फल मिलता है.

विज्ञापन
download 15
कृष्ण भगवान

सावन महीने की एकादशी की कहानी-

एक समय की बात है जब एक गांव में एक वीर क्षत्रिय रहता था. एक बार किसी बात पर कहासुनी होने पर उसकी एक ब्राह्मण से लड़ाई हो जाती है. जिसके कारण उसके हाथों से ब्राह्मण की मृत्यु हो जाती है. इसके बाद वह क्षत्रिय अपने हाथों से मरे हुए ब्राह्मण एक दिन किसी कारण वश उसकी ब्राहमण से हाथापाई हो गई और ब्राहमण की मृत्य हो गई. उस क्षत्रिय ने अपने हाथों से मारे गये ब्राह्मण की क्रिया करने का निश्चय किया. लेकिन पंडितों ने उसे क्रिया में शामिल होने से मना कर दिया. उन्होंने उसको बताया कि तुमने ब्राह्मण की हत्या की है. इस कारण तुमपर ब्रहम हत्या का दोष है. पहले तुमको इसका प्रायश्चित कर इस पाप से मुक्त होना पड़ेगा. इसके बाद ही हम तुम्हारे घर भोजन करेंगे.

download 1 8
विष्णु भगवान

इसके बाद क्षत्रिय ने ब्राह्मणों से पूछा की ब्रह्म हत्या के दोष से मुक्त होने के लिए उनको क्या करना होगा. तब ब्राहमणों ने बताया कि श्रावण माह के कृष्ण पश्र की एकादशी को भक्तिभाव से भगवान श्रीधर का व्रत एवं पूजन कर ब्राहमणों को भोजन कराके श्रद्धा के साथ आशीर्वाद प्राप्त करने से इस पाप से मुक्ति मिल जाएगी. ब्राह्मणओं के बताए इस उपाय के अनुसार उसने व्रत किया. जिसके बाद व्रत करने वाली रात में भगवान श्रीधर ने उस क्षत्रिय को दर्शन देकर कहा कि तुम्हें ब्रहम हत्या के पाप से मुक्ति मिल गई है.

यह भी पढ़ें : जैन धर्म के अनुसार मुनिराज के पहले 108 क्यों लगाते है?

श्री कृष्ण भगवान ने युद्धिष्टर को सुनाई थी ये कथा-

ऐसी मान्यता है कि यह कथा श्री कृष्ण भगवान ने युद्धिष्टर को सुनाई थी. श्रीकृष्ण भगवान कहने लगे कि हे युधिष्ठिर! इस एकादशी की कथा एक समय स्वयं ब्रह्माजी ने देवर्षि नारद से कही थी, वही मैं तुमसे कहता हूँ. नारदजी ने ब्रह्माजी से पूछा था कि हे पितामह! श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी की कथा सुनने की मेरी इच्छा है, उसका क्या नाम है? क्या विधि है ?जिसके बाद नारद जी को ये कथा ब्रह्मा जी ने सुनाई थी तथा वहीं कथा श्री कृष्ण भगवान ने युद्धिष्टर को सुनाई थी.

Today latest news in hindi के लिए लिए हमे फेसबुक , ट्विटर और इंस्टाग्राम में फॉलो करे | Get all Breaking News in Hindi related to live update of politics News in hindi , sports hindi news , Bollywood Hindi News , technology and education etc.  

KJ

Kapil Jakhar

कपिल जाखड़ News4Social के कंटेंट राइटर हैं। वे समसामयिक घटनाक्रम, फ़ीचर और सामान्य ज्ञान से जुड़े विषयों पर लिखते हैं, और जानकारी को सरल व तथ्यपरक भाषा में प्रस्तुत करने पर ज़ोर देते हैं। सभी लेख देखें →

आगे पढ़ें

और देखें →