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महाभारत को घर में न रखने के पीछे क्या अवधरणा जोड़ी हुई है?

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महाभारत हिन्दू धर्म में सबसे पवित्र ग्रन्थ माना जाता है। इस ग्रन्थ द्वारा लोगो को धर्म , सदाचार , मर्यादा और विवेक का ज्ञान प्रदान किया जाता है। महाभारत के भीषण युद्ध का सबसे बड़ा कारण पृथ्वी पर धर्म की स्थापना था लेकिन इस पवित्र ग्रन्थ के सन्दर्भ में यह मान्यता है की इससे घर में नहीं रखना चाहिए यहाँ तक की बड़े-बुजुर्गों का भी यह कहना होता है की महाभारत को घर में नहीं रखना चाहिए और ना ही इसका घर में पाठ करना चाहिए क्योंकि इससे घर में लड़ाई-झगड़े होते हैं और परिवार के सदस्यों के बीच क्रोध और अशांति का माहौल बना रहता है।

आपको बताना चाहेंगे की इसके पीछे यह धारणा जुड़ी हुई है की महाभारत में भाइयों को आपस में एक दूसरे के खून का प्यासा होता दिखाया गया है इसलिए परिवार के अंतर्गत युद्ध न हो इसलिए घर में महाभारत को रखने या पढ़ने पर अवरुद्ध है लेकिन साथ ही आपको यह भी बता दे की प्राचीनकाल में हर घर में महाभारत ग्रंथ होता था लेकिन मध्यकाल में यह धारणा कैसे फैली या फैलाई गई की महाभारत को घर में नहीं रखना चाहिए यह अभी भी रहस्य है। यह एक अफवाह है जो अब सच के रूप में स्थापित हो चुकी है।

महाभारत के द्वारा वेद, पुराण, उपनिषद, भारतीय इतिहास और हिन्दुओं के संपूर्ण ग्रंथों का सार और निचोड़ मिलता है। अगर मन कभी विचलित हो तो श्रीकृष्ण द्वारा महाभारत में दिए गए सार या शोलक को पढ़ने से विश्वभर का ज्ञान मिल जाता है। दरअसल महाभारत एकमात्र ऐसा ग्रंथ है जो संपूर्ण हिन्दू धर्म और उसके इतिहास को काफी बेहतरीन तरीके से प्रस्तुत करता है और इसके द्वारा धर्म, नीति, ज्ञान, तर्क, राजनीति, मोक्ष, विद्या और संपूर्ण कलाओं का ज्ञान प्राप्त हो सकता है। कोई अधर्मी ही चाह सकता हैं कि यह ग्रंथ हिन्दू नहीं पढ़ें ताकि वह इस ग्रंथ से कटा जा सके और धर्म के ज्ञान से वंचित रहे। इस ग्रन्थ को लेकर कई धाराएँ विधमान है आप किस धारण से वाकिफ है या आगे चलकर अपनाते है वो आपके ऊपर निर्भर है।

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