रविवार, 27 सितम्बर 2026 · नई दिल्ली
राजनीति

मतदाता सूची से 13 करोड़ नाम हटाने पर BJP-कांग्रेस में टकराव, पवन खेड़ा ने उठाए विश्वसनीयता पर सवाल

मतदाता सूची के एक विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision - SIR) के बाद 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए जाने को लेकर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और कांग्रेस के बीच एक बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा…

मतदाता सूची से 13 करोड़ नाम हटाने पर BJP-कांग्रेस में टकराव, पवन खेड़ा ने उठाए विश्वसनीयता पर सवाल
(फोटो: IANS)

मतदाता सूची के एक विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision - SIR) के बाद 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए जाने को लेकर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और कांग्रेस के बीच एक बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, दोनों दलों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक-दूसरे पर तीखे आरोप लगाए हैं, जिससे वोटर लिस्ट की शुचिता और प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

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यह विवाद तब शुरू हुआ जब बीजेपी ने अपने आधिकारिक 'एक्स' हैंडल पर एक पोस्ट में कहा कि एसआईआर के तहत 2.8 करोड़ मृत मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। पार्टी ने विपक्षी 'इंडी' गठबंधन पर निशाना साधते हुए सवाल किया, "सवाल सीधा है कि वोटर लिस्ट में इन नामों को बनाए रखने से किसे फायदा हुआ? कौन ऐसे नाम चाहता है जिनका इस्तेमाल फर्जी वोटिंग के लिए किया जा सके?" बीजेपी ने आगे कहा, "अब जब एसआईआर वोटर लिस्ट को साफ-सुथरा बना रहे हैं, तो इंडी अलायंस हंगामा कर रहा है। क्यों?"

कांग्रेस का पलटवार और तीखे सवाल

बीजेपी के इस दावे पर कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने आंकड़ों के साथ पलटवार किया। उन्होंने बताया कि एसआईआर के तहत कुल 13 करोड़ वोटरों के नाम हटाए गए हैं। खेड़ा ने पूछा, "भाजपा का कहना है कि इनमें से 2.8 करोड़ वोटर ऐसे थे जिनकी मौत हो चुकी थी, ठीक है। बाकी बचे 10.2 करोड़ वोटरों का क्या?"

पवन खेड़ा ने मतदाता सूची के सालाना अपडेट की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। उन्होंने लिखा, "अगर 2.8 करोड़ मरे हुए लोगों के नाम वोटर लिस्ट में थे, तो क्या 2014 से हर साल होने वाला 'समरी रिवीजन' (वोटर लिस्ट का सालाना अपडेट) सच में इतना खराब था?" उन्होंने इसे बीजेपी सरकार की विफलता बताते हुए कहा, "क्या भाजपा यह मान रही है कि वह सालों से वोटर लिस्ट को ठीक से बनाए रखने में नाकाम रही है?"

दोनों दलों के अपने-अपने तर्क

कांग्रेस का मुख्य आरोप है कि विशेष पुनरीक्षण के नाम पर बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम काटे जा रहे हैं, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है। वहीं, बीजेपी का तर्क है कि यह प्रक्रिया मतदाता सूची को पारदर्शी और फर्जी मतदान से मुक्त बनाने के लिए आवश्यक है। बीजेपी का आरोप है कि विपक्षी गठबंधन अपने राजनीतिक लाभ के लिए मृत मतदाताओं के नाम सूची में बनाए रखना चाहता है।

इनपुट: IANS

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News4Social राजनीति डेस्क

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