बिजली की बढ़ती मांग के बीच सरकार का बड़ा फैसला, कैप्टिव पावर प्लांट्स को पूरी क्षमता से उत्पादन का निर्देश
देश में बिजली की बढ़ती खपत और मांग-आपूर्ति के समीकरण को देखते हुए केंद्र सरकार ने एक अहम कदम उठाया है। बिजली मंत्रालय ने अपने विशेष अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए कोयले से चलने वाले निजी बिजली…
देश में बिजली की बढ़ती खपत और मांग-आपूर्ति के समीकरण को देखते हुए केंद्र सरकार ने एक अहम कदम उठाया है। बिजली मंत्रालय ने अपने विशेष अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए कोयले से चलने वाले निजी बिजली संयंत्रों (कैप्टिव पावर प्लांट्स) को अपनी पूरी क्षमता पर उत्पादन करने का निर्देश दिया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, इस फैसले का मुख्य उद्देश्य ग्रिड में बिजली की उपलब्धता बढ़ाना और उपभोक्ताओं को निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना है।
यह आदेश उन सभी कैप्टिव कोयला आधारित बिजली संयंत्रों पर लागू होगा जिनकी क्षमता 50 मेगावाट या उससे अधिक है। सरकार ने यह निर्देश बिजली अधिनियम की धारा 11 के तहत जारी किया है, जो असाधारण परिस्थितियों में सरकार को उत्पादन कंपनियों को विशेष निर्देश देने का अधिकार देती है।
क्या है नया आदेश?
इस निर्देश के मुताबिक, इन संयंत्रों को अपनी औद्योगिक जरूरतों को पूरा करने के बाद बची हुई सारी अतिरिक्त बिजली पावर एक्सचेंजों पर बेचनी होगी। यह कदम 1 अक्टूबर से प्रभावी होगा और 31 दिसंबर, 2026 तक लागू रहेगा। सरकार को उम्मीद है कि इस उपाय से अतिरिक्त बिजली ग्रिड में आएगी, जिससे बाजार में बिजली की उपलब्धता बढ़ेगी और व्यस्त समय (पीक डिमांड) की जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी।
कोयला भंडार और निगरानी
मंत्रालय ने इन बिजली उत्पादकों को यह भी सुनिश्चित करने के लिए कहा है कि उनके पास पर्याप्त कोयला भंडार हो, ताकि उत्पादन में कोई रुकावट न आए। व्यवस्था की निगरानी के लिए, इन कंपनियों को केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) को साप्ताहिक रिपोर्ट देनी होगी। इस रिपोर्ट में कुल बिजली उत्पादन, कैप्टिव खपत, बेची गई बिजली, उपलब्ध उत्पादन क्षमता और कोयला भंडार के स्तर का पूरा विवरण देना होगा।
इनपुट: IANS



