रविवार, 27 सितम्बर 2026 · नई दिल्ली
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समुद्री व्यापार में बढ़ते खतरों के बीच भारतीय बीमा पूल बना कवच, प्रीमियम 40% तक घटा

दुनिया भर में बढ़ते तनाव और युद्ध के माहौल में समुद्री व्यापार के लिए जोखिम लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे में भारत का अपना 'समुद्री बीमा पूल' (BMIP) भारतीय कारोबारियों और जहाजों के लिए एक बड़े सहारे के तौर…

समुद्री व्यापार में बढ़ते खतरों के बीच भारतीय बीमा पूल बना कवच, प्रीमियम 40% तक घटा
(फोटो: IANS)

दुनिया भर में बढ़ते तनाव और युद्ध के माहौल में समुद्री व्यापार के लिए जोखिम लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे में भारत का अपना 'समुद्री बीमा पूल' (BMIP) भारतीय कारोबारियों और जहाजों के लिए एक बड़े सहारे के तौर पर उभरा है। समाचार एजेंसी IANS की ओर से जारी एक सरकारी फैक्टशीट के अनुसार, इस पूल ने न सिर्फ युद्ध जैसे खतरों के लिए बीमा को आसान बनाया है, बल्कि पश्चिम एशिया में टकराव के बाद से प्रीमियम में भी 35 से 40 प्रतिशत तक की कमी लाने में मदद की है।

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मई 2024 में शुरू किए गए इस पूल ने 7 सितंबर 2024 तक 3000 से ज्यादा पॉलिसी जारी की हैं। इनमें माल के लिए 3000 युद्ध-जोखिम पॉलिसी, जहाजों के ढांचे (Hull) के लिए 92 पॉलिसी और 3 संरक्षण व क्षतिपूर्ति (P&I) पॉलिसी शामिल हैं। इस पहल का मुख्य उद्देश्य विदेशी बीमा कंपनियों पर भारत की निर्भरता को कम करना और वैश्विक संकटों के दौरान किफायती दरों पर लगातार बीमा कवरेज सुनिश्चित करना है।

क्या है भारत समुद्री बीमा पूल (BMIP)?

यह एक घरेलू बीमा व्यवस्था है जिसे 13,906.50 करोड़ रुपए (1.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर) के कवरेज के साथ लॉन्च किया गया था। यह पूल भारतीय ध्वज वाले या भारतीय कंपनियों द्वारा नियंत्रित जहाजों को समुद्री बीमा मुहैया कराता है। IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, यह जहाज के ढांचे (हल स्ट्रक्चर), मशीनरी, माल और युद्ध से जुड़े जोखिमों के लिए घरेलू स्तर पर बीमा कवर प्रदान करता है।

इस व्यवस्था के तहत, पॉलिसी तो घरेलू बीमा कंपनियां जारी करती हैं, लेकिन जोखिम का पुनर्बीमा पूल के सभी सदस्य मिलकर उठाते हैं। 100 मिलियन डॉलर तक के दावों का निपटान आरक्षित फंड से किया जाता है, जबकि इससे बड़ी रकम के लिए सॉवरेन गारंटी (सरकारी गारंटी) का इस्तेमाल होता है।

व्यापारियों और देश को कैसे मिल रहा है फायदा?

यह पूल कई तरह से भारतीय समुद्री व्यापार को मजबूती दे रहा है:

  • संपत्ति की सुरक्षा: यह जहाजों के मुख्य ढांचे, इंजन और अन्य उपकरणों को होने वाले नुकसान से बचाता है, जिससे भारतीय जहाजी बेड़े की पूंजी देश के भीतर ही सुरक्षित और बीमित रहती है।
  • निर्यात-आयात में मदद: ऊंचे जोखिम वाले समुद्री रास्तों पर भी माल के नुकसान या खराबी से सुरक्षा देकर यह भारतीय निर्यातकों और आयातकों को बड़ा फायदा पहुंचाता है।
  • युद्ध जैसे खतरों से बचाव: लाल सागर और होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे संवेदनशील इलाकों से गुजरने वाले भारतीय व्यापार मार्गों के लिए यह बेहद अहम है। यह सशस्त्र संघर्ष, समुद्री डकैती, आतंकवाद और दुश्मन द्वारा जहाज जब्त किए जाने जैसे खतरों के खिलाफ बीमा सुरक्षा देता है।

सरकारी फैक्टशीट में इस बात पर जोर दिया गया है कि BMIP भारत की समुद्री वित्तीय स्वतंत्रता की दिशा में एक बड़ा कदम है। इसका लक्ष्य सभी पक्षों के लिए विश्वसनीय संचालन, प्रतिस्पर्धी मूल्य और भरोसेमंद दावा निपटान सुनिश्चित करना है।

इनपुट: IANS

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