संयुक्त राष्ट्र में विदेश मंत्री जयशंकर और महासचिव गुटेरेस की मुलाक़ात, 'ग्लोबल साउथ' पर केंद्रित रही बातचीत
भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र (UN) के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस से मुलाक़ात की है। भारतीय समयानुसार मंगलवार को हुई इस बैठक का मुख्य केंद्रबिंदु दुनिया भर में जारी संघर्षों को…
भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र (UN) के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस से मुलाक़ात की है। भारतीय समयानुसार मंगलवार को हुई इस बैठक का मुख्य केंद्रबिंदु दुनिया भर में जारी संघर्षों को कम करने और विशेष रूप से 'ग्लोबल साउथ' पर पड़ रहे उनके असर को लेकर था। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, दोनों नेताओं ने वैश्विक तनाव कम करने की आवश्यकता पर चर्चा की।
मुलाक़ात के बाद डॉ. जयशंकर ने कहा, "संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस से मिलकर खुशी हुई। हमारी बातचीत चल रहे झगड़ों और उनके असर को कम करने की जरूरत पर फोकस थी, खासकर ग्लोबल साउथ को लेकर।" यह बैठक न्यूयॉर्क में आयोजित कई कार्यक्रमों के बीच हुई, जिसमें विदेश मंत्री ने भारत की विदेश नीति और वैश्विक कूटनीति पर भी अपने विचार रखे।
भारत की विदेश नीति और अमेरिका
इससे पहले सोमवार को न्यूयॉर्क में हुए एक कार्यक्रम में विदेश मंत्री ने भारत की रणनीतिक स्वायत्तता की नीति पर बात की। उन्होंने कहा कि भारत लंबे समय से अपने हितों के अनुसार स्वतंत्र फैसले लेता रहा है और कई देशों के साथ एक साथ रिश्ते संभालता रहा है, और अब अमेरिका भी यही दृष्टिकोण अपना रहा है।
अमेरिका के पूर्व सहायक विदेश मंत्री डैनियल रसेल से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा, "हमारे बारे में जो बातें पहले कही जाती थीं, आज वॉशिंगटन वही काम पूरे जोश के साथ कर रहा है।" उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा, "आप चीन से बात कर रहे हैं, रूस से बात कर रहे हैं, यूक्रेन से बात कर रहे हैं और एशिया के दूसरे हिस्सों या यूरोप के साथ भी संबंध संभाल रहे हैं।"
कूटनीतिक स्वायत्तता पर जयशंकर का नज़रिया
बातचीत के दौरान जब डैनियल रसेल ने एक साथ कई काम संभालने की अमेरिकी कहावत 'च्यूइंग गम चबाना और चलना' का जिक्र किया, तो डॉ. जयशंकर ने मज़ाक में कहा, "मुझे लगता है कि वॉशिंगटन में उस च्यूइंगम की काफी बड़ी सप्लाई है।" उनका इशारा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका की उस नीति की ओर था, जहाँ वह एक ही समय में कई देशों के साथ अलग-अलग तरह के और कभी-कभी परस्पर विरोधी हितों वाले रिश्ते भी संभाल रहा है।
विदेश मंत्री ने कहा कि एक समय था जब भारत जैसे देशों से अपेक्षा की जाती थी कि वे किसी एक देश पर अपने रिश्ते केंद्रित करें, जबकि अमेरिका जैसी वैश्विक शक्तियाँ अपने लिए कई विकल्प खुले रखती थीं। उन्होंने कहा कि आज यह दिखावा खत्म हो गया है और अब हर देश खुले तौर पर सभी के साथ संबंध बना रहा है।
इनपुट: IANS



