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रियल एस्टेट कंपनी वाटिका लिमिटेड पर ED की बड़ी कार्रवाई, 33 करोड़ की संपत्ति और लग्जरी गाड़ियां ज़ब्त

दिल्ली-एनसीआर के एक बड़े रियल एस्टेट समूह वाटिका लिमिटेड पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शिकंजा कसा है। एजेंसी ने मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों की जांच के सिलसिले में कंपनी और उसके प्रमोटरों से जुड़े सा…

रियल एस्टेट कंपनी वाटिका लिमिटेड पर ED की बड़ी कार्रवाई, 33 करोड़ की संपत्ति और लग्जरी गाड़ियां ज़ब्त
(फोटो: IANS)

दिल्ली-एनसीआर के एक बड़े रियल एस्टेट समूह वाटिका लिमिटेड पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शिकंजा कसा है। एजेंसी ने मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों की जांच के सिलसिले में कंपनी और उसके प्रमोटरों से जुड़े सात ठिकानों पर छापेमारी की है। इस कार्रवाई में लगभग 33 करोड़ रुपये की संपत्ति ज़ब्त की गई है, जिसमें महंगी लग्जरी गाड़ियां और गहने भी शामिल हैं।

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समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, ईडी के गुरुग्राम ज़ोनल ऑफिस ने यह तलाशी अभियान 25 अगस्त 2026 को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 के तहत चलाया। यह कार्रवाई कंपनी, उसके प्रमोटर-डायरेक्टर अनिल भल्ला, गौतम भल्ला, गौरव भल्ला और अन्य के खिलाफ दर्ज मामले में की गई। ईडी की यह जांच दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) द्वारा दर्ज की गई कई FIR पर आधारित है। इन FIR में कंपनी पर धोखाधड़ी, रिहायशी प्लॉट न देने और अन्य संबंधित अपराधों के आरोप लगाए गए हैं।

क्या हैं धोखाधड़ी के आरोप?

जांच में वाटिका इंडिया नेक्स्ट और वाटिका इंडिया नेक्स्ट-2 प्रोजेक्ट्स से जुड़े लेन-देन में एक जैसा तरीका सामने आया है। आरोप है कि कंपनी ने प्लॉट आवंटन के नाम पर ग्राहकों से बड़ी रकम तो ले ली, लेकिन कई समय-सीमा बीत जाने के बाद भी वादे के मुताबिक प्लॉट का एक बड़ा हिस्सा नहीं दिया।

जांच के अनुसार, 2010 और 2012 के बीच पीड़ितों से लगभग 260.30 करोड़ रुपये की रकम ली गई, लेकिन इसके बदले केवल करीब 120 करोड़ रुपये मूल्य के ही प्लॉट दिए गए। 14 साल बीत जाने के बाद भी खरीदारों को बाकी प्लॉट नहीं मिले। इसके अलावा, यह भी आरोप है कि आरोपी व्यक्तियों ने पीड़ित कंपनी की अनुमति के बिना 14 प्लॉट गुपचुप तरीके से किसी तीसरे पक्ष को बेच दिए।

छापेमारी में क्या-क्या मिला?

ईडी ने तलाशी अभियान के दौरान कई अहम दस्तावेज़ और डिजिटल डिवाइस बरामद किए हैं। इनमें वाटिका लिमिटेड के प्रमोटरों से जुड़े प्रॉपर्टी के दस्तावेज़, ऑडिट की गई वित्तीय रिपोर्ट, टैली डेटा और फंड के हेरफेर से जुड़े रिकॉर्ड शामिल हैं। छापेमारी के दौरान तीन महंगी लग्जरी गाड़ियां, गहने और बैंक खातों व सिक्योरिटीज़ को भी ज़ब्त किया गया, जिनकी कुल कीमत लगभग 33 करोड़ रुपये है। ईडी ने कहा है कि मामले में आगे की जांच जारी है ताकि फंड के दुरुपयोग की पूरी जानकारी सामने आ सके।

इनपुट: IANS

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News4Social नेशनल डेस्क

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