वसई-विरार: फर्जी दस्तावेजों से बनी 8 मंजिला इमारत, 113 फ्लैट बेचकर धोखाधड़ी के आरोप में दो बिल्डर गिरफ्तार
महाराष्ट्र के वसई-विरार इलाके में फर्जी दस्तावेजों के सहारे एक पूरी आठ मंजिला इमारत खड़ी करने और उसमें बने 113 फ्लैट बेचकर लोगों से धोखाधड़ी करने का एक बड़ा मामला सामने आया है। समाचार एजेंसी IANS से…
महाराष्ट्र के वसई-विरार इलाके में फर्जी दस्तावेजों के सहारे एक पूरी आठ मंजिला इमारत खड़ी करने और उसमें बने 113 फ्लैट बेचकर लोगों से धोखाधड़ी करने का एक बड़ा मामला सामने आया है। समाचार एजेंसी IANS से मिली जानकारी के अनुसार, इस मामले में वसई की क्राइम ब्रांच यूनिट-2 ने व्हीव्ही कंस्ट्रक्शन के दो मालिकों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों पर जाली निर्माण अनुमति और फर्जी प्रारंभ प्रमाणपत्र (Commencement Certificate) का इस्तेमाल कर सरकार और फ्लैट खरीदारों के साथ धोखा करने का आरोप है।
गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान कमलेश महादेव पाटिल (40) और विशाल विनायक पाटिल (38) के रूप में हुई है। पुलिस के मुताबिक, इन्होंने विरार पूर्व के नारिंगी गांव में 'ध्रुवी हाइट्स-2' नाम से एक अवैध इमारत का निर्माण किया। फिर इन्हीं फर्जी दस्तावेजों के आधार पर उप-पंजीयक कार्यालय में फ्लैटों का रजिस्ट्रेशन भी करवा लिया, ताकि खरीदारों को लगे कि सब कुछ कानूनी है।
जांच और पुलिस की कार्रवाई
इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब मुकेश शिवसागर उपाध्याय नामक एक व्यक्ति ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के बाद क्राइम ब्रांच ने जांच शुरू की और वसई-विरार शहर महानगरपालिका से संबंधित जानकारी भी हासिल की। शुरुआती जांच में ही कमलेश महादेव पाटिल और विशाल विनायक पाटिल की संलिप्तता के सबूत मिले, जिसके बाद 19 अक्टूबर को विरार पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज कर दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया।
पुलिस ने दोनों आरोपियों को 29 अक्टूबर 2026 तक की हिरासत में लिया है, ताकि इस गिरोह में शामिल अन्य लोगों का पता लगाया जा सके। यह कार्रवाई पुलिस कमिश्नर निकेत कौशिक और डीसीपी (अपराध) संदीप डोईफोडे के मार्गदर्शन में की गई।
पीड़ितों से आगे आने की अपील
जांच अधिकारियों का फोकस अब यह पता लगाने पर है कि ये फर्जी दस्तावेज कैसे तैयार किए गए और इस धोखाधड़ी में और कौन-कौन लोग शामिल थे। पुलिस ने 'ध्रुवी हाइट्स-2' में फ्लैट खरीदने वाले अन्य लोगों से भी अपील की है कि अगर वे ठगी का शिकार हुए हैं, तो जांच अधिकारी से संपर्क कर अपनी शिकायत दर्ज कराएं ताकि उसे भी जांच में शामिल किया जा सके।
इनपुट: IANS



