ठाणे डेटा सेंटर प्रोजेक्ट: संजय राउत ने सीएम को पत्र लिखकर तत्काल रोक और जांच की मांग की
महाराष्ट्र के ठाणे में बन रहे एक डेटा सेंटर प्रोजेक्ट को लेकर शिवसेना (UBT) के सांसद संजय राउत ने गंभीर चिंताएं जताई हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को एक पत्र लिखकर इस परियोजना पर तत्काल…
महाराष्ट्र के ठाणे में बन रहे एक डेटा सेंटर प्रोजेक्ट को लेकर शिवसेना (UBT) के सांसद संजय राउत ने गंभीर चिंताएं जताई हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को एक पत्र लिखकर इस परियोजना पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, राउत ने अपने पत्र में स्थानीय बुनियादी ढांचे, संसाधनों की खपत और पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों का हवाला दिया है।
राउत का तर्क है कि जब तक राज्य सरकार डेटा सेंटरों के लिए एक व्यापक नीति नहीं बना लेती, तब तक ठाणे में चल रहे इस काम को रोक देना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि तकनीकी विकास जरूरी है, लेकिन यह स्थानीय निवासियों की बुनियादी नागरिक सुविधाओं और पारिस्थितिक संतुलन की कीमत पर नहीं होना चाहिए। यह मांग ऐसे समय में आई है जब मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन (MMR) में कई डेटा सेंटर बनाए जा रहे हैं, जिसको लेकर नागरिक कार्यकर्ता पहले से ही बिजली, पानी और तापमान वृद्धि (हीट आइलैंड) को लेकर चिंता जता रहे हैं।
विस्तृत जांच और पारदर्शिता की मांग
संजय राउत ने मुख्यमंत्री से कई ठोस कदम उठाने का आग्रह किया है। उनकी प्रमुख मांगों में ठाणे नगर निगम (TMC), महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPCB), बिजली और पानी की आपूर्ति करने वाले विभागों, प्रोजेक्ट डेवलपर्स और स्थानीय नागरिकों के प्रतिनिधियों की एक संयुक्त परामर्श बैठक बुलाना शामिल है।
इसके अलावा, उन्होंने मांग की है कि प्रोजेक्ट से जुड़ी सभी नियामक मंजूरियां, जैसे निर्माण, पानी और बिजली का आवंटन, पेड़ काटने की अनुमति और पर्यावरणीय मंजूरी, सार्वजनिक की जाएं। राउत ने यह भी कहा कि इस प्रोजेक्ट में पानी की खपत, उसके स्रोत, रीसाइक्लिंग क्षमता और कूलिंग तकनीक का मूल्यांकन स्वतंत्र विशेषज्ञों से कराया जाना चाहिए।
बिजली, प्रदूषण और सार्वजनिक सुनवाई पर जोर
पत्र में बिजली की मांग, सप्लाई की व्यवस्था और स्थानीय ग्रिड पर पड़ने वाले भार का पूरा विवरण प्रकाशित करने की भी मांग की गई है। राउत ने यह भी सवाल उठाया है कि बिजली के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने का खर्च कौन उठाएगा।
पर्यावरणीय चिंताओं को उठाते हुए उन्होंने मांग की है कि आसपास की रिहायशी इमारतों पर शोर और वायु प्रदूषण के असर का आकलन किया जाए। साथ ही, उन्होंने निवासियों की बात सीधे सुनने के लिए एक खुली जन-सुनवाई आयोजित करने की पुरजोर वकालत की है। राउत ने कहा कि अगर नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो काम तुरंत रोका जाना चाहिए और सुधारात्मक कदम उठाने के बाद ही उसे फिर से शुरू करने की अनुमति दी जाए। फिलहाल, मुख्यमंत्री कार्यालय से इस पत्र पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
इनपुट: IANS



