उत्तर प्रदेश में 'गो-आधारित ग्रीन इकोनॉमी' को बढ़ावा, हर जिले में लगेंगे 1000 से ज्यादा बायोगैस प्लांट
उत्तर प्रदेश सरकार राज्य में 'गो-आधारित ग्रीन इकोनॉमी' का एक बड़ा अभियान शुरू करने की तैयारी में है, जिसका लक्ष्य ग्रामीण क्षेत्रों को ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर बनाना और जैविक खेती को बढ़ावा देना…
उत्तर प्रदेश सरकार राज्य में 'गो-आधारित ग्रीन इकोनॉमी' का एक बड़ा अभियान शुरू करने की तैयारी में है, जिसका लक्ष्य ग्रामीण क्षेत्रों को ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर बनाना और जैविक खेती को बढ़ावा देना है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत प्रदेश के हर जिले में 1,000 से अधिक मिनी बायोगैस प्लांट स्थापित किए जाएँगे।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा प्रदेश की गोशालाओं को 'रूरल रिसोर्स एंड एनर्जी हब' के तौर पर विकसित करने की है। इस पूरी कवायद में गोबर से बायोगैस, बायो-सीएनजी और ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर बनाने से लेकर भविष्य में कार्बन क्रेडिट तक की एक पूरी वैल्यू चेन तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार का उद्देश्य गो-आधारित उत्पादों को आय, ऊर्जा और रोजगार का एक स्थायी जरिया बनाना है।
तकनीकी और औद्योगिक साझेदारी
इस प्रोजेक्ट की सफलता के लिए तकनीकी और औद्योगिक सहयोग पर विशेष जोर दिया जा रहा है। उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि इस योजना में आईआईटी दिल्ली तकनीकी साझेदार की भूमिका निभाएगा। आईआईटी प्लांट की तकनीक, संचालन, रखरखाव के साथ-साथ युवाओं के प्रशिक्षण की जिम्मेदारी भी संभालेगा।
इसके अलावा, इस क्षेत्र में काम कर रही 15 से भी ज़्यादा अग्रणी कंपनियों ने ग्रामीण इलाकों में इस परियोजना से जुड़ने में रुचि दिखाई है। इससे गाँवों तक आधुनिक तकनीक और निजी क्षेत्र के अनुभव का लाभ पहुँचेगा।
ग्रामीणों और युवाओं को लाभ
इस पहल से सीधे तौर पर ग्रामीणों को फायदा होगा। प्लांट लगाने के लिए अनुदान देने की रूपरेखा भी तैयार की जा रही है। इन प्लांट्स से पैदा होने वाली गैस का इस्तेमाल घरेलू ईंधन के रूप में किया जा सकेगा, जिससे परिवारों का रसोई गैस पर होने वाला खर्च कम होगा। वहीं, प्लांट से निकलने वाली स्लरी उच्च गुणवत्ता वाली जैविक खाद का काम करेगी, जिससे रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता घटेगी।
आईआईटी दिल्ली के प्रशिक्षण कार्यक्रम के माध्यम से प्रदेश भर में 'ग्रीन टेक्नीशियन' की एक नई पीढ़ी तैयार की जाएगी। यह योजना स्वयं सहायता समूहों और ग्रामीण उद्यमियों के लिए भी स्वरोजगार के नए अवसर पैदा करेगी।
इनपुट: IANS



