कुशीनगर: गंडक नदी खतरे के निशान से ऊपर, 32 गांवों में बाढ़ राहत कार्य युद्धस्तर पर जारी
उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले में बड़ी गंडक नदी का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर गया है, जिससे दो तहसीलों के 32 गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, योगी सरकार के…
उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले में बड़ी गंडक नदी का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर गया है, जिससे दो तहसीलों के 32 गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, योगी सरकार के निर्देशों पर जिला प्रशासन ने प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव अभियान तेज कर दिया है। प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के साथ-साथ भोजन और चिकित्सा जैसी तत्काल सहायता मुहैया कराई जा रही है।
बाढ़ की यह स्थिति वाल्मीकि नगर बैराज से बड़ी मात्रा में पानी छोड़े जाने के बाद उत्पन्न हुई। 29 सितंबर को सुबह आठ बजे बड़ी गंडक नदी का जलस्तर 96.48 मीटर दर्ज किया गया, जो 96 मीटर के खतरे के बिंदु से 0.48 मीटर अधिक था। इसके चलते खड्डा तहसील के 18 और तमकुहीराज तहसील के 14 गांव प्रभावित हुए हैं।
राहत और बचाव के लिए बहु-स्तरीय टीमें तैनात
राहत आयुक्त डॉ. हृषिकेश भास्कर यशोद ने प्रशासन को युद्धस्तर पर काम करने के निर्देश दिए हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए, बचाव कार्य के लिए एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और पीएसी की बाढ़ राहत टीमों को तैनात किया गया है। इसके अतिरिक्त, स्थानीय स्तर पर नावों और 66 स्थानीय गोताखोरों की एक टीम को भी सक्रिय किया गया है ताकि किसी भी आपात स्थिति से निपटा जा सके।
प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों की निगरानी के लिए 10 बाढ़ चौकियां बनाई हैं और विस्थापित परिवारों के लिए 16 राहत शिविर स्थापित किए हैं।
भोजन और स्वास्थ्य सुविधाओं पर जोर
बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए भोजन की व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए कुल 16 सामुदायिक रसोईघर चलाए जा रहे हैं, जिनमें 13 खड्डा में और तीन तमकुहीराज तहसील में हैं। इन रसोइयों के माध्यम से नियमित रूप से पका हुआ भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। अब तक 13,030 लंच पैकेट और 2,100 राशन किट भी बांटे जा चुके हैं।
स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए दो मेडिकल टीमों को लगाया गया है। प्रशासन ने यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि प्रभावित परिवारों तक आवश्यक चिकित्सा सहायता पहुंचे। इसके अलावा, पुलिस, स्वास्थ्य, पशुपालन और विद्युत आपूर्ति जैसे संबंधित विभागों को भी राहत कार्यों में सक्रिय रूप से शामिल किया गया है।
इनपुट: IANS



