यूपी में बाढ़ का बढ़ता खतरा: 13 जिलों के 173 गांव चपेट में, 4800 से ज़्यादा लोग सुरक्षित निकाले गए
उत्तर प्रदेश में कई नदियों का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है, जिससे निपटने के लिए प्रशासन पूरी तरह से अलर्ट मोड पर है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य के 13 जिलों के 173…
उत्तर प्रदेश में कई नदियों का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है, जिससे निपटने के लिए प्रशासन पूरी तरह से अलर्ट मोड पर है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य के 13 जिलों के 173 गांव बाढ़ से प्रभावित हुए हैं, जिसके चलते अब तक 4,845 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका है। स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है, लेकिन संभावित बाढ़ के पूर्वानुमान को देखते हुए राहत और बचाव का पूरा तंत्र सक्रिय कर दिया गया है।
प्रदेश के राहत आयुक्त डॉ. हृषिकेश भास्कर यशोद ने मंगलवार को स्थिति की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारियों को प्रभावितों के लिए भोजन, चिकित्सा और सुरक्षित आवास सुनिश्चित करने के सख्त निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जान-माल की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए बाढ़ चौकियों को पूरी तरह सक्रिय रखा जाए और नदियों के जलस्तर पर लगातार निगरानी की जाए।
राहत और बचाव के प्रयास
बाढ़ से अब तक बदायूं, बहराइच, बलिया, बाराबंकी, बिजनौर, फर्रूखाबाद, गौतमबुद्धनगर, गोंडा, कासगंज, लखीमपुर खीरी, मुजफ्फरनगर, सीतापुर और उन्नाव जिले प्रभावित हुए हैं। इन जिलों में लगभग 13,058 हेक्टेयर क्षेत्र और 84,362 लोग बाढ़ की चपेट में हैं।
प्रशासन द्वारा की गई व्यवस्थाएं:
- प्रभावितों के लिए 1,263 बाढ़ शरणालय बनाए गए हैं, जिनमें से 41 में 1,045 लोग रह रहे हैं।
- राहत कार्यों के लिए 1,589 बाढ़ चौकियां, 428 नाव और मोटर बोट तथा 1,101 स्थानीय गोताखोर तैनात किए गए हैं।
- अब तक 15,238 राहत खाद्यान्न पैकेट और 30,316 लंच पैकेट बांटे जा चुके हैं।
- बाढ़ में क्षतिग्रस्त हुए 94 मकानों में से 65 के मालिकों को सहायता राशि दी जा चुकी है।
पशुधन और स्वास्थ्य सेवाएं
बाढ़ प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं को भी चाक-चौबंद रखा गया है। 724 मेडिकल टीमें और 534 एंबुलेंस तैनात की गई हैं। अब तक 19,406 लोगों का इलाज किया जा चुका है और 566 लोगों को एंटी-स्नेक वेनम उपलब्ध कराया गया है। मच्छरजनित बीमारियों से बचाव के लिए 1,468 गांवों में लार्वीसाइडल का छिड़काव हुआ है।
बाढ़ से करीब 6,067 पशु भी प्रभावित हुए हैं। उनके लिए 208 क्विंटल भूसा बांटा गया है, जबकि 11,465 बीमार पशुओं का उपचार और 4,04,036 पशुओं का टीकाकरण किया गया है।
सुरक्षा बलों की तैनाती और निगरानी
किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए प्रदेश में NDRF की 16 टीमें, कई जिलों में SDRF की टीमें और 52 जिलों में PAC की तैनाती की गई है। राहत आयुक्त कार्यालय का कंट्रोल रूम लगातार प्रभावित जिलों के संपर्क में है और हेल्पलाइन नंबर 1070 पर आने वाली सूचनाओं पर तत्काल कार्रवाई की जा रही है।
राहत आयुक्त ने बताया कि बाराबंकी में घाघरा नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है, जबकि बदायूं और फर्रूखाबाद में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान पर है। कई अन्य नदियों में भी जलस्तर बढ़ने की आशंका जताई गई है, जिसे लेकर प्रशासन लगातार निगरानी कर रहा है।
इनपुट: IANS



