भारत-उरुग्वे संबंध: 75 साल बाद नए अध्याय की शुरुआत, मोंटेवीडियो में खुलेगा भारतीय दूतावास
भारत और उरुग्वे के बीच राजनयिक संबंधों के 75 साल पूरे होने के मौके पर एक अहम फैसला लिया गया है, जिसके तहत भारत जल्द ही दक्षिण अमेरिकी देश उरुग्वे में अपना दूतावास खोलने जा रहा है। समाचार एजेंसी IANS…
भारत और उरुग्वे के बीच राजनयिक संबंधों के 75 साल पूरे होने के मौके पर एक अहम फैसला लिया गया है, जिसके तहत भारत जल्द ही दक्षिण अमेरिकी देश उरुग्वे में अपना दूतावास खोलने जा रहा है। समाचार एजेंसी IANS से खास बातचीत में, भारत में उरुग्वे के राजदूत अल्बर्टो एंटोनियो गुआनी अमरिला ने इस कदम को दोनों देशों के रिश्तों में एक मील का पत्थर बताया।
यह जानकारी उरुग्वे के राष्ट्रीय दिवस समारोह के अवसर पर सामने आई, जिसमें भारत का प्रतिनिधित्व विदेश सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने किया था। राजदूत अमरिला ने कहा, "हम दोनों देशों के बीच संबंधों को लेकर बहुत उम्मीद कर रहे हैं क्योंकि हम पहले ही अपने दोनों देशों के बीच राजनयिक रिश्तों के 75 साल पूरे होने का जश्न मना चुके हैं। साथ ही, हम एक अहम मोड़ पर हैं, क्योंकि भारत उरुग्वे में एक दूतावास खोलने जा रहा है।" उन्होंने यह भी उम्मीद जताई कि विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर दूतावास के उद्घाटन समारोह में शामिल हो सकते हैं।
व्यापार और नेतृत्व पर उरुग्वे का दृष्टिकोण
राजदूत अमरिला ने दोनों देशों के बीच बढ़ते व्यापारिक संबंधों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत और दक्षिण अमेरिका के बीच मौजूदा व्यापार लगभग 50 बिलियन डॉलर का है, जिसके 2030 तक 100 बिलियन डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है। उनके अनुसार, "मेरा मानना है कि यह तो बस शुरुआत है।"
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वैश्विक भूमिका की सराहना करते हुए उन्होंने कहा, "उनकी छवि बहुत सकारात्मक है। प्रधानमंत्री ने दुनिया को एक परिवार की तरह देखने के विचार को बढ़ावा दिया है।" उन्होंने विकासशील देशों के लिए पीएम मोदी के समर्थन और दक्षिण अमेरिका के साथ भारत के जुड़ाव को मजबूत करने के उनके प्रयासों को महत्वपूर्ण बताया। राजदूत ने पिछले साल ब्राजील में उरुग्वे के राष्ट्रपति यामांडू ओरसी और प्रधानमंत्री मोदी के बीच हुई मुलाकात का जिक्र करते हुए भविष्य में दोनों नेताओं के एक-दूसरे के देशों का दौरा करने की भी उम्मीद जताई।
वैश्विक मुद्दों और शांति पर साझा विचार
अंतरराष्ट्रीय तनावों पर चर्चा करते हुए, राजदूत अमरिला ने अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा, "भारत की तरह, उरुग्वे भी शांति को महत्व देने वाला देश है। हम देशों के बीच झगड़ों का समर्थन नहीं करते हैं। हमारा मानना है कि मतभेदों को बातचीत और शांतिपूर्ण तरीकों से सुलझाया जाना चाहिए।" उन्होंने ऊर्जा के नवीकरणीय स्रोतों में निवेश के महत्व पर भी जोर दिया ताकि संघर्ष का कारण बनने वाले संसाधनों पर निर्भरता कम हो सके और एक स्थायी भविष्य सुनिश्चित किया जा सके।
इनपुट: IANS



