जापानी यूनिट 731: पूर्व सदस्य की गवाही ने खोला राज़, चीन में दफ़नाए थे ज़हरीली गैस के बम
चीन में द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जापानी सेना की कुख्यात यूनिट 731 के अपराधों से जुड़ा एक और सबूत सामने आया है। यूनिट के एक पूर्व सदस्य की मौखिक गवाही ने इस बात की पुष्टि की है कि हार से ठीक पहले…
चीन में द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जापानी सेना की कुख्यात यूनिट 731 के अपराधों से जुड़ा एक और सबूत सामने आया है। यूनिट के एक पूर्व सदस्य की मौखिक गवाही ने इस बात की पुष्टि की है कि हार से ठीक पहले जापानी सेना ने चीन में बड़ी संख्या में ज़हरीली गैस के बम ज़मीन में दफ़ना दिए थे। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, यह 70 मिनट की गवाही चीन के एक संग्रहालय द्वारा 12 अगस्त को जारी किए गए नए ऐतिहासिक दस्तावेजों का हिस्सा है।
यह अहम गवाही 2016 में जापान की यात्रा के दौरान यूनिट 731 अपराध साक्ष्य संग्रहालय द्वारा रिकॉर्ड की गई थी। इसमें यूनिट की हैलार टुकड़ी के पूर्व चिकित्सक तानिजाकी हितोशी ने अपने अनुभव साझा किए हैं। वीडियो में उन्होंने स्वीकार किया कि जब वे सेना में भर्ती हुए तो उनकी उम्र 21 साल थी।
सबूत मिटाने की कोशिश
तानिजाकी हितोशी ने बताया कि जब जापानी सेना पीछे हट रही थी, तो उसने सबूत मिटाने के लिए अपनी सभी सुविधाओं में आग लगा दी थी। उन्होंने खुलासा किया, "वह बैक्टीरिया नहीं, ज़हरीली गैस थी" और "ज़हरीली गैस इकाई मौजूद थी, जिसकी स्थापना फुलारजी में हुई थी।" उनकी गवाही इस बात की पुष्टि करती है कि इसी क्रम में जापानी ज़हरीली गैस इकाई ने गुप्त रूप से बड़ी संख्या में रासायनिक बमों को दफ़ना दिया था।
ऐतिहासिक और व्यावहारिक महत्व
संग्रहालय के शोधकर्ता चिन शिछेंग के अनुसार, यह मौखिक विवरण सीधे तौर पर इस बात की पुष्टि करता है कि जापानी सेना ने अपनी हार के दौरान चीन में रासायनिक हथियार छोड़े थे। उन्होंने कहा कि यह गवाही युद्ध के बाद मिली ज़हरीली गैस की विरासत की ऐतिहासिक जड़ों को भी स्पष्ट करती है, जिसका काफ़ी व्यावहारिक महत्व है। यह खुलासा जापानी रासायनिक हथियारों के परित्याग के मुद्दे पर आगे के शोध के लिए एक अपराधी का प्रत्यक्ष मौखिक साक्ष्य प्रदान करता है।
इनपुट: IANS



