मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
स्वास्थ्य

आयोडीन की कमी: रोज़ के नमक से जुड़ी यह एक बात आपकी सेहत के लिए क्यों ज़रूरी है?

हर साल 21 अक्टूबर को विश्व आयोडीन अल्पता दिवस मनाया जाता है ताकि एक बेहद ज़रूरी पोषक तत्व के महत्व को याद किया जा सके। यह पोषक तत्व है आयोडीन, जो हमारे शरीर के लिए बहुत थोड़ी मात्रा में ही ज़रूरी है…

आयोडीन की कमी: रोज़ के नमक से जुड़ी यह एक बात आपकी सेहत के लिए क्यों ज़रूरी है?
(फोटो: IANS)

हर साल 21 अक्टूबर को विश्व आयोडीन अल्पता दिवस मनाया जाता है ताकि एक बेहद ज़रूरी पोषक तत्व के महत्व को याद किया जा सके। यह पोषक तत्व है आयोडीन, जो हमारे शरीर के लिए बहुत थोड़ी मात्रा में ही ज़रूरी है, लेकिन इसकी कमी से होने वाली स्वास्थ्य समस्याएं गंभीर हो सकती हैं। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, आयोडीन की कमी का सबसे बड़ा असर थायरॉइड ग्रंथि पर पड़ता है, जो शरीर के कई महत्वपूर्ण कार्यों को नियंत्रित करती है।

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आयोडीन ही वह तत्व है जिसकी मदद से थायरॉइड ग्रंथि थायरॉइड हार्मोन बनाती है। ये हार्मोन शरीर के मेटाबॉलिज़्म (भोजन को ऊर्जा में बदलने की प्रक्रिया), तापमान और सामान्य विकास को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाते हैं। जब शरीर को पर्याप्त आयोडीन नहीं मिलता, तो ग्रंथि ज़रूरी मात्रा में हार्मोन नहीं बना पाती, जिससे हाइपोथायरायडिज्म जैसी स्थिति पैदा हो सकती है। इसके लक्षणों में थकान, सुस्ती, वज़न बढ़ना और ठंड ज़्यादा लगना शामिल है।

गर्भावस्था और बचपन में विशेष जोखिम

आयोडीन की कमी का असर हर उम्र के व्यक्ति पर पड़ सकता है, लेकिन गर्भवती महिलाओं और बच्चों के लिए यह विशेष रूप से खतरनाक है। गर्भावस्था के दौरान इसकी कमी गर्भ में पल रहे शिशु के मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र के विकास को नुकसान पहुँचा सकती है। कुछ गंभीर मामलों में यह गर्भपात या समय से पहले प्रसव का कारण भी बन सकती है। इसी तरह, शिशुओं और छोटे बच्चों में आयोडीन की कमी उनकी सीखने-समझने की क्षमता और शारीरिक विकास को प्रभावित कर सकती है।

आयोडीन की कमी का एक और स्पष्ट संकेत घेंघा रोग है, जिसमें थायरॉइड ग्रंथि का आकार बढ़ने से गर्दन के सामने सूजन दिखने लगती है। लंबे समय तक यह कमी बने रहने पर शरीर के सामान्य कामकाज पर भी असर पड़ सकता है।

कैसे करें आयोडीन की पूर्ति?

आयोडीन की कमी से बचने का सबसे सरल उपाय आयोडीन युक्त नमक का नियमित इस्तेमाल करना है। विशेषज्ञों की सलाह है कि नमक खरीदते समय पैकेट पर ‘आयोडीन युक्त’ ज़रूर देख लें। नमक को हमेशा नमी और गर्मी से दूर एक बंद डिब्बे में रखना चाहिए ताकि उसकी गुणवत्ता बनी रहे।

हालांकि, यह भी ध्यान रखना ज़रूरी है कि ज़रूरत से ज़्यादा नमक का सेवन भी स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है और इससे उच्च रक्तचाप जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए, सीमित मात्रा में आयोडीन युक्त नमक का सेवन करें। दूध, दही, अंडे और कुछ समुद्री खाद्य पदार्थों में भी प्राकृतिक रूप से आयोडीन पाया जाता है। संतुलित आहार के साथ आयोडीन युक्त नमक शरीर की ज़रूरतें पूरी करने में मदद करता है। किसी भी तरह के आयोडीन सप्लीमेंट को डॉक्टर की सलाह के बिना नहीं लेना चाहिए।

इनपुट: IANS

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News4Social हेल्थ डेस्क

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