HIV/AIDS से जंग पर संकट: वैश्विक फंडिंग में भारी गिरावट, दशकों की मेहनत पर पानी फिरने का खतरा - UN रिपोर्ट
एचआईवी/एड्स के खिलाफ दशकों की वैश्विक लड़ाई एक नाजुक मोड़ पर आ खड़ी हुई है। संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी UNAIDS ने अपनी एक नई रिपोर्ट में चेतावनी दी है कि अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सहायता में भारी गिरावट के…
एचआईवी/एड्स के खिलाफ दशकों की वैश्विक लड़ाई एक नाजुक मोड़ पर आ खड़ी हुई है। संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी UNAIDS ने अपनी एक नई रिपोर्ट में चेतावनी दी है कि अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सहायता में भारी गिरावट के कारण इस महामारी के दोबारा फैलने का खतरा बढ़ गया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, अगर दुनिया ने तत्काल एकजुट होकर प्रयास नहीं किए, तो पिछले कई दशकों में हासिल हुई प्रगति पर पानी फिर सकता है।
सोमवार को जारी 60 पन्नों की इस रिपोर्ट में बताया गया है कि साल 2025 के लिए एचआईवी की रोकथाम के लिए अंतरराष्ट्रीय फंडिंग 18 प्रतिशत घटकर 7.3 अरब डॉलर रह गई है। यह लगभग दो दशकों में वित्तीय सहायता का सबसे निचला स्तर है। इस कमी के चलते नए संक्रमणों और एड्स से होने वाली मौतों में जो गिरावट आ रही थी, वह रुझान अब पलट सकता है।
अमेरिका की फंडिंग में कमी का बड़ा असर
रिपोर्ट में इस गिरावट का एक बड़ा कारण अमेरिका द्वारा फंडिंग में की गई कटौती को बताया गया है। अमेरिका, जो पहले वैश्विक एचआईवी फंडिंग का लगभग 75 प्रतिशत हिस्सा देता था, उसने जनवरी 2025 में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के व्हाइट हाउस लौटने के बाद एचआईवी से जुड़े सभी कार्यक्रमों की फंडिंग पर अस्थायी रोक लगा दी थी। एजेंसी के अनुसार, हालांकि बाद में जीवनरक्षक उपचारों के लिए वित्तीय मदद बहाल कर दी गई, लेकिन ज्यादातर परियोजनाओं के लिए फंडिंग सीमित ही रही।
2030 का लक्ष्य पटरी से उतरा
UNAIDS ने स्पष्ट किया है कि मौजूदा राजनीतिक और वित्तीय अस्थिरता के माहौल में 2030 तक एड्स को खत्म करने का वैश्विक लक्ष्य पटरी से उतरता दिख रहा है। फंडिंग की कमी के अलावा, इबोला जैसी अन्य स्वास्थ्य आपदाओं ने भी इस दिशा में किए जा रहे प्रयासों पर असर डाला है। पिछले साल ही दुनिया भर में लगभग 12 लाख लोग एचआईवी से संक्रमित हुए।
रोकथाम और जांच सेवाओं पर सबसे ज्यादा प्रभाव
फंडिंग में आई इस बाधा का सबसे बुरा असर एचआईवी की रोकथाम, जांच और समुदाय आधारित स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ा है। ये सेवाएं उन लोगों तक पहुंचने के लिए महत्वपूर्ण हैं जिन्हें संक्रमण का सबसे ज्यादा खतरा होता है। उदाहरण के लिए, कैमरून, नाइजीरिया और जाम्बिया जैसे देशों में एचआईवी से बचाव के लिए दी जाने वाली दवा (PrEP) पाने वालों की संख्या में 50 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि कुछ देशों ने घरेलू बजट बढ़ाकर इस कमी की आंशिक भरपाई की है, फिर भी कुल एचआईवी संसाधनों में 6 प्रतिशत की गिरावट आई है, खासकर उप-सहारा अफ्रीका जैसे क्षेत्रों में, जहां दुनिया के आधे नए संक्रमण होते हैं।
इनपुट: IANS



