शनिवार, 11 जुलाई 2026 · नई दिल्ली
पश्चिम बंगाल

समान नागरिक संहिता (UCC) पर बंगाल सरकार का बड़ा कदम, मसौदा विधेयक की समीक्षा के लिए 9-सदस्यीय समिति गठित

पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य में प्रस्तावित समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के मसौदा विधेयक को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया तेज कर दी है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, इस मसौदे की समीक्षा और इसे

समान नागरिक संहिता (UCC) पर बंगाल सरकार का बड़ा कदम, मसौदा विधेयक की समीक्षा के लिए 9-सदस्यीय समिति गठित
(फोटो: IANS)

पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य में प्रस्तावित समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के मसौदा विधेयक को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया तेज कर दी है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, इस मसौदे की समीक्षा और इसे अंतिम रूप देने के लिए सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में एक नौ-सदस्यीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया गया है।

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राज्य के न्यायिक विभाग द्वारा शुक्रवार को जारी अधिसूचना में बताया गया कि यह कदम 2 जुलाई को हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में लिए गए फैसले के आधार पर उठाया गया है। सरकार का मानना है कि इस विषय की जटिलता और व्यापकता को देखते हुए, विधानसभा में विधेयक पेश करने से पहले इसका विस्तृत परीक्षण आवश्यक है।

समिति की संरचना और उद्देश्य

जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाली इस उच्च-स्तरीय समिति में समाज के विभिन्न क्षेत्रों से विशेषज्ञों को शामिल किया गया है। इनमें मेघालय के पूर्व राज्यपाल तथागत रॉय, आईएएस अधिकारी दुष्यंत नारियाला, सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी शत्रुघ्न सिंह, और गृह विभाग की प्रधान सचिव संघमित्रा घोष भी शामिल हैं।

इनके अलावा, समिति में बंगबासी कॉलेज की रिटायर्ड एसोसिएट प्रोफेसर रत्ना भट्टाचार्य, गौर बंगा विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति गोपालचंद्र मिश्रा, कलकत्ता उच्च न्यायालय के वकील उस्मान गनी मलिक और संभाग के पूर्व कार्यकारी निदेशक निर्मल्य भट्टाचार्य को भी सदस्य बनाया गया है।

संवैधानिक आधार और लक्ष्य

अधिसूचना के अनुसार, सरकार ने यह फैसला भारतीय संविधान के भाग-4 में वर्णित नीति-निर्देशक सिद्धांतों के अनुच्छेद 44 के अनुरूप किया है, जो राज्य को अपने नागरिकों के लिए एक समान नागरिक संहिता लागू करने का निर्देश देता है। इस प्रस्तावित 'समान नागरिक संहिता, पश्चिम बंगाल- 2026' का मुख्य उद्देश्य सभी धर्मों, आस्थाओं और समुदायों के निवासियों के लिए विवाह, तलाक, और उत्तराधिकार जैसे व्यक्तिगत नागरिक मामलों को एक समान कानूनी ढांचे के तहत लाना है।

इनपुट: IANS

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