भाजपा के दो विधायक बने बागी, कांग्रेस के समर्थन में किया वोट, बताई ये वजह

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मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सरकार को गिराने की चुनौती भाजपा को उस वक्त उलटी पड़ गई जब उसके दो विधायकों ने सदन में वोटिंग के दौरान कांग्रेस के समर्थन में वोट कर दिया। विधायकों के इस फैसले से भाजपा को तगड़ा झटका लगा है।

दरअसल, कर्नाटक में जेडीएस-कांग्रेस गठबंधन सरकार के गिरने से जोश में आई भारतीय जनता पार्टी की सूबे की कमलनाथ सरकार को गिराने की चाल उस समय फीकी पड़ जब विधानसभा में बीजेपी के दो विधायकों नारायण त्रिपाठी और शरद कौल ने आपराधिक कानून ( मध्य प्रदेश संशोधन) बिल, 2019 पर चर्चा के दौरान क्रॉस वोटिंग कर दी। फ्लोर टेस्ट में  कांग्रेस के समर्थन में कुल 122 वोट पड़े, जो बुहमत से सात ज्यादा हैं। इसमें कांग्रेस के 113 (स्पीकर को छोड़कर) बसपा के दो, सपा का एक, चार निर्दलीय और भाजपा के दो विधायकों के वोट भी शामिल हैं।

राज्य में कमलनाथ सरकार ने शक्ति परीक्षण कर साबित कर दिया कि उनकी सरकार सुरक्षित है। इससे पहले, कर्नाटक में गठबंधन की सरकार के गिरने के बाद उत्साहित होकर भाजपा के कुछ नेता इस दंभ में आ गए कि मध्य प्रदेश में सरकार गिराई जा सकती है। विधानसभा में नेता विपक्ष गोपाल भार्गव ने मुख्यमंत्री कमलनाथ को चुनौती कि पार्टी के नंबर एक और दो आदेश दें तो 24 घंटे में सरकार गिरा देंगे।

वहीं, मुख्यमंत्री कमलनाथ ने इस पूरे घटनाक्रम पर मीडिया को संबोधित करते हुए कहा, भाजपा बहुत दावे कर रही थी, अब दूध का दूध और पानी का पानी हो गया। आगे उन्होंने निशाना साधते हुए कहा, भाजपा को दूसरों का घर तोड़ने की बड़ी इच्छा रहती है, लेकिन वह खुद अपने ही विधायकों पर नहीं रोक पाई।

राज्य विधानसभा में पास हुए बिल विधायकों के कांग्रेस के समर्थन में वोट करने पर भाजपा ने कहा, किसी बिल पर सरकार के पक्ष में वोटिंग करने से कोई विधायक दूसरे दल का नहीं हो जाता।

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