टोल प्लाज़ा घोटाला: ED की बड़ी कार्रवाई, 6 राज्यों में 14 ठिकानों पर छापे, करोड़ों की हेराफेरी का खुलासा
देश के कई टोल प्लाज़ा पर करोड़ों रुपए की धोखाधड़ी के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक बड़ी कार्रवाई की है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, ED की इलाहाबाद सब-ज़ोनल टीम ने धन शोधन निवारण अधिनियम…
देश के कई टोल प्लाज़ा पर करोड़ों रुपए की धोखाधड़ी के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक बड़ी कार्रवाई की है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, ED की इलाहाबाद सब-ज़ोनल टीम ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत उत्तर प्रदेश, दिल्ली-एनसीआर, राजस्थान, मध्य प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और पश्चिम बंगाल में 14 ठिकानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया।
यह पूरा मामला उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा दर्ज एक FIR के बाद शुरू हुआ। पुलिस ने जनवरी 2024 में मिर्ज़ापुर के अट्रैला शिव गुलाम टोल प्लाज़ा पर एक घोटाले का पर्दाफाश किया था, जहाँ एक अनधिकृत मोबाइल ऐप के ज़रिए उन वाहनों से टोल वसूला जा रहा था, जिनके फास्टैग में या तो बैलेंस नहीं था या बहुत कम था।
कैसे काम करता था यह घोटाला?
जांच में सामने आया है कि इस धोखाधड़ी को अंजाम देने के लिए 'मॉबडेटा' और 'एनी' नाम के दो अवैध ऐप बनाए गए थे। ये ऐप फ़र्ज़ी रसीदें बनाते थे और टोल वसूली की जानकारी को भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के आधिकारिक सिस्टम से छिपा लेते थे। इससे सरकारी खज़ाने को भारी राजस्व का नुकसान हो रहा था। ED के मुताबिक, आरोपियों ने इस अवैध वसूली की निगरानी के लिए अलग से पोर्टल भी बना रखे थे।
आरोपियों से ज़ब्त किए गए डिजिटल उपकरणों की फोरेंसिक जांच से पता चला है कि इस सिस्टम का इस्तेमाल देश के करीब 100 टोल प्लाज़ा पर किया जा रहा था। डिजिटल रिकॉर्ड में करोड़ों रुपए की अनधिकृत टोल रसीदों का हिसाब मिला है। जांच में NHAI द्वारा नियुक्त बिचौलियों और टोल वसूली एजेंसियों की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है।
छापेमारी में क्या मिला?
बुधवार को हुई इस तलाशी के दौरान, ED की टीमों ने लगभग 1.03 करोड़ रुपए नकद, कई बैंक खाते से जुड़े दस्तावेज़, वित्तीय रिकॉर्ड, अकाउंट बुक और डिजिटल डिवाइस ज़ब्त किए हैं। इसके अलावा, अधिकारियों ने 8 बैंक लॉकर भी फ्रीज़ कर दिए हैं। एजेंसी को लेन-देन और संदिग्ध बातचीत से जुड़े कई आपत्तिजनक दस्तावेज़ भी मिले हैं, जिनकी आगे जांच की जाएगी।
इनपुट: IANS



