FCNR(B) जमा: विश्व बैंक के नीलकांत मिश्रा ने कहा- भारत को पुनर्भुगतान की चिंता क्यों नहीं करनी चाहिए
विश्व बैंक में भारत के कार्यकारी निदेशक नीलकांत मिश्रा ने कहा है कि भारत को विदेशी मुद्रा अनिवासी (बैंक) यानी FCNR(B) जमाओं के पुनर्भुगतान को लेकर परेशान होने की ज़रूरत नहीं है। उन्होंने इन जमाओं को…
विश्व बैंक में भारत के कार्यकारी निदेशक नीलकांत मिश्रा ने कहा है कि भारत को विदेशी मुद्रा अनिवासी (बैंक) यानी FCNR(B) जमाओं के पुनर्भुगतान को लेकर परेशान होने की ज़रूरत नहीं है। उन्होंने इन जमाओं को पूंजी जुटाने का एक 'काफी सस्ता' स्रोत बताया है। समाचार एजेंसी IANS से बातचीत में उन्होंने कहा कि अगर ज़रूरत पड़ी तो देश परिपक्वता के समय एक और FCNR(B) योजना जारी कर सकता है।
मिश्रा ने समझाया कि भारत को FCNR(B) के तहत 6.5 से 7 प्रतिशत की ब्याज दर पर पूंजी मिल रही है, जो कि एक किफायती विकल्प है। आँकड़ों के अनुसार, 31 अगस्त, 2026 तक भारत की विशेष USD-INR फॉरेक्स स्वैप सुविधा के तहत कुल 136.4 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा आई। इसमें FCNR(B) जमा की हिस्सेदारी सबसे ज़्यादा, यानी 93 प्रतिशत थी।
विदेशी मुद्रा का हिसाब
कुल विदेशी मुद्रा में FCNR(B) होल्डिंग्स का हिस्सा 127.2 अरब डॉलर रहा। इसके अलावा, विदेशी मुद्रा में लिए गए विदेशी कर्ज की हिस्सेदारी 5.26 अरब डॉलर और बाहरी कमर्शियल कर्ज (ECB) का हिस्सा 3.89 अरब डॉलर था। मिश्रा ने इस बात पर ज़ोर दिया कि देश में आने वाला हर डॉलर एक देनदारी है, चाहे वह एफडीआई, पोर्टफोलियो निवेश या किसी और ज़रिए से आए।
चालू खाता घाटा और बाहरी कर्ज
विश्व बैंक के कार्यकारी निदेशक ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत के चालू खाता घाटे (Current Account Deficit) को देश की आर्थिक कमजोरी के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। उनके मुताबिक, यह बचत और निवेश के बीच के अंतर को दर्शाता है। उन्होंने कहा, "जब चालू खाता घाटा होता है, तो आप पर देनदारी आती है। इसलिए या तो आप अपनी संपत्ति बेच रहे होते हैं... या फिर आप कर्ज ले रहे होते हैं।"
मिश्रा के अनुसार, जीडीपी के मुकाबले बाहरी कर्ज की स्थिति के लिहाज़ से भारत की अर्थव्यवस्था बेहद मज़बूत है और तेज़ी से आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि देश के लिए सबसे बड़ी चिंता यह होनी चाहिए कि आने वाली विदेशी पूंजी का इस्तेमाल किस तरह किया जा रहा है।
इनपुट: IANS



