शुक्रवार, 4 सितम्बर 2026 · नई दिल्ली
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डेरिवेटिव्स सेटलमेंट: SEBI नियमों की समीक्षा करेगा, एक हफ़्ते में आएगा नया प्रस्ताव

शेयर बाज़ार नियामक SEBI डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स के लिए सेटलमेंट प्राइस तय करने की मौजूदा व्यवस्था की समीक्षा करने जा रहा है। समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, नियामक अगले सप्ताह इस विषय पर एक परामर्श…

डेरिवेटिव्स सेटलमेंट: SEBI नियमों की समीक्षा करेगा, एक हफ़्ते में आएगा नया प्रस्ताव
(फोटो: IANS)

शेयर बाज़ार नियामक SEBI डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स के लिए सेटलमेंट प्राइस तय करने की मौजूदा व्यवस्था की समीक्षा करने जा रहा है। समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, नियामक अगले सप्ताह इस विषय पर एक परामर्श पत्र (consultation paper) जारी करेगा, जिसमें मौजूदा प्रणाली में कुछ बदलाव प्रस्तावित किए जा सकते हैं। यह कदम क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) लागू होने के बाद बाज़ार के भागीदारों से मिले सुझावों और प्रतिक्रियाओं के आधार पर उठाया जा रहा है।

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बाज़ार भागीदारों की मुख्य चिंता यह है कि डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स की एक्सपायरी पर सेटलमेंट की कीमत CAS से तय होने वाले क्लोजिंग प्राइस पर आधारित नहीं होनी चाहिए। SEBI ने बताया कि सोशल मीडिया, अन्य मीडिया प्लेटफॉर्म्स और विभिन्न माध्यमों से उसे इस व्यवस्था पर पुनर्विचार करने के लिए कई सुझाव मिले हैं।

क्यों हो रहा है यह बदलाव?

दरअसल, SEBI ने 3 अगस्त 2026 से इक्विटी कैश सेगमेंट में क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) की व्यवस्था लागू की थी। यह फैसला 16 जनवरी 2026 के एक सर्कुलर के तहत लिया गया था। इसी व्यवस्था के तहत, CAS में तय होने वाले क्लोजिंग प्राइस को ही डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स के सेटलमेंट का आधार बनाया गया था।

SEBI ने बताया कि CAS का ढाँचा तैयार करने से पहले दिसंबर 2024 और अगस्त 2025 में दो चरणों में सार्वजनिक परामर्श सहित हितधारकों के साथ व्यापक विचार-विमर्श किया गया था।

बाज़ार से लगातार संवाद

नियामक के अनुसार, CAS लागू होने के बाद उसने इसके क्रियान्वयन से जुड़ी चुनौतियों को समझने और हल करने के लिए स्टॉक एक्सचेंजों, ब्रोकरों, म्यूचुअल फंडों और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) समेत सभी संबंधित पक्षों के साथ लगातार संवाद बनाए रखा। SEBI ने पहले महीने के दौरान CAS के कामकाज और बाज़ार पर इसके असर की निगरानी भी की। इन्हीं अनुभवों और सुझावों को देखते हुए अब सेटलमेंट प्राइस की पद्धति में बदलाव पर विचार किया जा रहा है।

इनपुट: IANS

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