TMC के नाम-निशान पर रोक: ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी
तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर दो गुटों के विवाद के बाद पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न 'जोड़ा फूल और घास' के इस्तेमाल पर चुनाव आयोग द्वारा लगाई गई रोक का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुँच गया है। समाचार…
तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर दो गुटों के विवाद के बाद पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न 'जोड़ा फूल और घास' के इस्तेमाल पर चुनाव आयोग द्वारा लगाई गई रोक का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुँच गया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शुक्रवार को इस अंतरिम आदेश को रद्द करने की मांग करते हुए शीर्ष अदालत में एक याचिका दायर की है।
अपनी याचिका में ममता बनर्जी ने ऋतब्रत बनर्जी और चुनाव आयोग को पक्षकार बनाया है। उन्होंने चुनाव आयोग के फैसले को 'असंवैधानिक, गैरकानूनी और अलोकतांत्रिक' करार देते हुए इसके खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ने की बात कही थी। उनका कहना था कि नए नाम और चिह्न को स्वीकार करना आयोग के आदेश को मानना नहीं है, बल्कि यह एक तात्कालिक व्यवस्था है।
विवाद क्या है और आयोग का आदेश क्या था?
पार्टी में दो प्रतिद्वंद्वी गुटों के उभरने के बाद चुनाव आयोग ने एक अंतरिम आदेश जारी किया था। इसके तहत, जब तक विवाद पर अंतिम फैसला नहीं हो जाता, तब तक दोनों में से कोई भी गुट 'ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' नाम और उसके पारंपरिक चुनाव चिह्न का उपयोग नहीं कर सकेगा। यह फैसला पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर 6 अक्टूबर को होने वाले उपचुनावों से ठीक पहले आया है, जिसका सीधा असर इन चुनावों पर पड़ेगा।
इस आदेश के बाद चुनाव आयोग ने शुक्रवार को दोनों गुटों के लिए अस्थायी तौर पर अलग-अलग नाम और चिह्न आवंटित कर दिए। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को 'ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' नाम और 'फुटबॉल प्लेयर' का चिह्न मिला है। वहीं, प्रतिद्वंद्वी गुट को 'डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस' नाम और 'लिफाफा' चुनाव चिह्न दिया गया है।
विपक्ष का समर्थन और आयोग पर सवाल
इस पूरे मामले पर ममता बनर्जी के गुट को कांग्रेस का भी समर्थन मिला है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने चुनाव आयोग और भाजपा पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि पहले शिवसेना, फिर एनसीपी और अब तृणमूल कांग्रेस के साथ भी वैसा ही व्यवहार हो रहा है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक संस्थाओं तथा स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनावों से जुड़ा मुद्दा बताते हुए चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल खड़े किए। इससे पहले कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने भी चुनाव आयोग के फैसले की आलोचना करते हुए उस पर भाजपा के पक्ष में काम करने का आरोप लगाया था।
इनपुट: IANS



