रविवार, 2 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
राजनीति

संसद सत्र से पहले सर्वदलीय बैठक में हंगामा, TMC के 'बागी' गुट को बुलाने पर विपक्ष ने किया वॉकआउट

संसद के मानसून सत्र की शुरुआत से ठीक पहले सरकार द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में विपक्ष ने एकजुट होकर विरोध जताया। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कथित बागी गुट के…

संसद सत्र से पहले सर्वदलीय बैठक में हंगामा, TMC के 'बागी' गुट को बुलाने पर विपक्ष ने किया वॉकआउट
(फोटो: IANS)

संसद के मानसून सत्र की शुरुआत से ठीक पहले सरकार द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में विपक्ष ने एकजुट होकर विरोध जताया। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कथित बागी गुट के सांसदों को बैठक में आमंत्रित किए जाने के मुद्दे पर कांग्रेस, सपा और 'आप' समेत कई विपक्षी दलों ने वॉकआउट कर दिया।

विज्ञापन

विपक्षी दलों का मुख्य आरोप था कि सरकार ने एक ऐसे गुट को बैठक में जगह दी, जिसे लोकसभा अध्यक्ष से मान्यता नहीं मिली है। तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा ने इस कदम को असंवैधानिक बताते हुए सवाल उठाया कि जब पार्टी के 20 कथित बागी सांसदों के खिलाफ अयोग्यता की 20 याचिकाएं लंबित हैं, तो संसदीय कार्य मंत्री ने उन्हें किस आधार पर आमंत्रित किया। उन्होंने कहा कि लोकसभा टेबल ऑफिस की सूची में ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस के 28 सांसद ही दर्ज हैं।

विपक्ष ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

बैठक से बाहर आने के बाद कई विपक्षी नेताओं ने सरकार पर निशाना साधा। कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा कि उनकी पार्टी ने संविधान की रक्षा और आम आदमी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस व शिवसेना के समर्थन में यह कदम उठाया है। समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव ने इसे सरकार का 'अलोकतांत्रिक कदम' करार दिया। उन्होंने कहा कि टीएमसी नेताओं ने बैठक में यह मुद्दा उठाया था कि आधिकारिक सांसदों से पहले कथित बागी सांसदों की सूची क्यों दिखाई गई।

झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) की सांसद महुआ माजी ने आरोप लगाया कि देश में सांसदों को लालच देकर राजनीतिक दलों को सुनियोजित तरीके से तोड़ा जा रहा है। उन्होंने महाराष्ट्र का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां भी बगावत करने वाले सांसदों को बैठक में बुलाया गया, जबकि स्पीकर ने अभी तक उन्हें मान्यता नहीं दी है।

परिसीमन पर भी उठी चिंता

इसी बैठक के दौरान जेएमएम सांसद महुआ माजी ने परिसीमन का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने चिंता व्यक्त की कि यदि 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन होता है तो झारखंड जैसे राज्यों में अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित सीटों का बड़ा नुकसान हो सकता है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार यह आश्वासन दे कि किसी भी राज्य की सीटें कम नहीं होंगी और सभी विपक्षी दल इस पर सहमत हों, तो उनकी पार्टी अपने रुख पर दोबारा विचार कर सकती है। हालांकि, उन्होंने यह भी बताया कि इस मुद्दे पर अभी तक कोई चर्चा नहीं हुई है।

इनपुट: IANS

N

News4Social राजनीति डेस्क

News4Social राजनीति डेस्क — IANS समेत लाइसेंस-प्राप्त समाचार एजेंसियों की फीड से राजनीति और चुनाव से जुड़ी ताज़ा व प्रामाणिक खबरें संपादकीय समीक्षा के बाद प्रकाशित करता है। हर खबर उसके स्रोत के श्रेय (credit) के साथ दी जाती है। सभी लेख देखें →

आगे पढ़ें

और देखें →