जानिए छठ पूजा के गुण?
अंग देश के राजा कर्ण ने गंगा नदी में छठ पर्व की शुरुआत की थी। अंग प्रदेश वर्तमान में बिहार का हिस्सा इसलिए छठ पूजा की शुरुआत बिहार से हुआ माना जाता है।
अंग देश के राजा कर्ण ने गंगा नदी में छठ पर्व की शुरुआत की थी। अंग प्रदेश वर्तमान में बिहार का हिस्सा इसलिए छठ पूजा की शुरुआत बिहार से हुआ माना जाता है। लेकिन अब यह पर्व सिर्फ बिहार तक सीमित नहीं रह गया है। देश के हर हिस्से में और यहां तक की विदेशों में भी छठ पर्व का आयोजन किया जाने लगा है और इसमें न सिर्फ लोग शामिल होते हैं बल्कि इस व्रत के फल और प्रभाव को देखकर दूसरे लोग भी इस व्रत को करने लगे हैं।
छठ पर्व के महात्म्य में बताया गया है कि इस व्रत को रखने से कई लाभ मिलते हैं। और यही वजह है कि लोग ठिठुराती ठंड में भी नदी, तालाब में खड़े होकर छठी मैय्या को अर्ग देते हैं। अगर आप भी इस पर्व के प्रभाव को जानेंगे तो आप भी कहेंगे छठ से बड़ा कोई पर्व नहीं।

छठ पर्व की कथा के अनुसार इस व्रत से संतान सुख की चाहत पूरी होती है। जिन लोगों की संतान अल्पायु होती है उनकी संतान को दीर्घायु का आशीर्वाद मिलता है। इसलिए छठ व्रत को निःसंतानों के लिए बहुत ही लाभप्रद बताया गया है।
छठ पर्व में सूर्य देवता की पूजा होती है। सूर्य को त्वचा रोग से मुक्ति दिलाने वाला माना गया है। इनकी पूजा से श्री कृष्ण के पुत्र कुष्ठ रोग से मुक्त हुए थे। इसलिए माना जाता है कि छठ पर्व से सभी प्रकार की त्वचा रोग से मुक्ति मिलती है।छठ पर्व को सौभाग्य का पर्व भी माना जाता है। कहते हैं इस पर्व से सुहाग की उम्र लंबी होती है। इसलिए महिलाएं पति एवं संतान के लिए इस व्रत को रखती हैं।

नौकरी व्यवसाय में बार-बार परेशानी आने पर छठ का व्रत बहुत ही लाभप्रद होता है। इससे नौकरी में व्यवसाय में उन्नति एवं स्थिरता प्राप्त होती है।सूर्य षष्ठी पर्व यानी छठ की पूजा से अन्न धन का भंडार बढ़ता है। इसलिए किसान अच्छी खेती के लिए छठ की पूजा करते हैं।



