भारत के इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण महिलाएं
महिला और पुरूष एक ही सिक्के के दो पहलु रहे हैं. किसी भी समय के समाज में महिलाओं को भी अपना विशेष महत्व रहा है.
महिला और पुरूष एक ही सिक्के के दो पहलु रहे हैं. किसी भी समय के समाज में महिलाओं को भी अपना विशेष महत्व रहा है. जिसमें उन्होंने देश की तरक्की में बढ-चढ़कर भाग लिया है. भारत के इतिहास की बात करें तो उसमें भी कई महिलाओं ने देश के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में अपना नाम दर्ज कराया है. सबका वर्णन करना तो संभव नही है, लेकिन कुछ महत्वपूर्ण महिलाएं जो भारत के इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान रखती हैं.

किसी भी देश के विकास में शिक्षा का विशेष महत्व होता है. शिक्षा के क्षेत्र में सबसे पहला नाम सावित्रीबाई ज्योतिराव फुले का आता है. जो भारत की प्रथम महिला शिक्षिका, समाज सुधारिका एवं मराठी कवयित्री थीं. उन्होंने अपने पति ज्योतिराव गोविंदराव फुले के साथ मिलकर स्त्री अधिकारों एवं शिक्षा के क्षेत्र में बहुत योगदान दिया. उन्हें आधुनिक मराठी काव्य का अग्रदूत माना जाता है. 1852 में उन्होंने बालिकाओं के लिए एक विद्यालय की स्थापना की थी. सावित्रीबाई पूरे देश की महानायिका हैं. उनको महिलाओं और दलित जातियों को शिक्षित करने के प्रयासों के लिए जाना जाता है. सावित्रीबाई ने अपने जीवन को एक मिशन की तरह से जीया जिसका उद्देश्य था विधवा विवाह करवाना, छुआछूत मिटाना, महिलाओं की मुक्ति और दलित महिलाओं को शिक्षित बनाना.

शिक्षा के साथ आत्मरक्षा और अधिकारों के लिए लड़ने की बात करें तो रानी लक्ष्मीबाई का नाम आता है. जो झाँसी की रानी के नाम से प्रसिद्ध हैं. मराठा शासित झांसी राज्य की रानी और 1857 की राज्यक्रांति की द्वितीय शहीद वीरांगना थीं. उन्होंने सिर्फ 29 साल की उम्र में अंग्रेज साम्राज्य की सेना से युद्ध किया और रणभूमि में वीरगति को प्राप्त हुई.

प्राचीन भारत की बात करें तो मैत्रेयी नाम की स्त्रि का इतिहास में विशेष स्थान है. वह मित्र ऋषि की कन्या और महर्षि याज्ञवल्क्य की दूसरी पत्नी थीं. शांत स्वभाव की मैत्रेयी की अध्ययन, चिंतन और शास्त्रार्थ में रुचि थी. वह जानती थीं कि धन-संपत्ति से आत्मज्ञान नहीं मिलता. आज हमारे लिए स्त्री शिक्षा बहुत बड़ा मुद्दा है, लेकिन हजारों साल पहले मैत्रेयी ने अपनी विद्वता से न केवल स्त्री जाति का मान बढ़ाया बल्कि उन्होंने यह भी सच साबित कर दिखाया था कि पत्नी धर्म का निर्वाह करते हुए भी स्त्री ज्ञान अर्जित कर सकती है.
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भारत की आजादी के संघर्ष में भी महिलाओं ने एक महत्वपूर्ण भूमिका निभायी. भिकाजी कामा, डॉ॰ एनी बेसेंट, प्रीतिलता वाडेकर, विजयलक्ष्मी पंडित, राजकुमारी अमृत कौर, अरुना आसफ़ अली, सुचेता कृपलानी और कस्तूरबा गाँधी कुछ प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानियों में शामिल रही हैं.



