भारत-थाईलैंड मैत्री 2024: जंगल वॉरफेयर और पारंपरिक युद्धकला 'मुए थाई' का संयुक्त अभ्यास जारी
भारत और थाईलैंड की सेनाओं के बीच आपसी सहयोग और सामरिक समझ को मजबूत करने के लिए 'मैत्री' नामक संयुक्त युद्धाभ्यास जारी है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, थाईलैंड के सूरतथानी में हो रहे इस अभ्यास का…
भारत और थाईलैंड की सेनाओं के बीच आपसी सहयोग और सामरिक समझ को मजबूत करने के लिए 'मैत्री' नामक संयुक्त युद्धाभ्यास जारी है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, थाईलैंड के सूरतथानी में हो रहे इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के सैनिकों को जंगल युद्ध और आतंकवाद विरोधी अभियानों के लिए तैयार करना है। 31 अगस्त तक चलने वाले इस सैन्य प्रशिक्षण में दोनों देशों के 85-85 जवान हिस्सा ले रहे हैं।
इस अभ्यास का आयोजन थाईलैंड के विभावदी रंगसित शिविर में किया जा रहा है, जिसका उद्घाटन रॉयल थाई सेना के 4थे आर्मी एरिया के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल नोराथिप फोयनोक की अध्यक्षता में हुआ। भारतीय दल का प्रतिनिधित्व 9 गोरखा राइफल्स कर रही है, जबकि थाईलैंड की ओर से 3वीं बटालियन, 25वीं इन्फैंट्री ब्रिगेड शामिल है।
जंगल युद्ध और आधुनिक तकनीक का संगम
इस युद्धाभ्यास के दौरान सैनिक जंगल और अर्ध-शहरी इलाकों में उग्रवाद और आतंकवाद से निपटने की तकनीकों का आदान-प्रदान कर रहे हैं। प्रशिक्षण में घायलों को प्राथमिक उपचार देने और उन्हें सुरक्षित निकालने के अभ्यास भी शामिल हैं। इसके अलावा, सैनिकों को संयुक्त अभियानों में मानवरहित हवाई वाहनों (ड्रोन) के इस्तेमाल का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है, ताकि वे आधुनिक तकनीक के साथ अभियान चला सकें।
'आठ अंगों की कला' मुए थाई का विशेष प्रशिक्षण
इस अभ्यास का एक विशेष आकर्षण थाईलैंड की पारंपरिक युद्धकला 'मुए थाई' का प्रशिक्षण रहा। इसे 'आठ अंगों की कला' भी कहा जाता है, जिसमें मुक्कों, कोहनियों, घुटनों और पिंडलियों का इस्तेमाल होता है। इस प्रशिक्षण का उद्देश्य सैनिकों की शारीरिक क्षमता, फुर्ती और नजदीकी लड़ाई के कौशल को बढ़ाना है। साथ ही, यह दोनों देशों के सैनिकों को एक-दूसरे की संस्कृति और सैन्य परंपराओं को समझने का अवसर भी प्रदान करता है, जिससे आपसी विश्वास और दोस्ती मजबूत होती है।
अभ्यास के अंतिम चरण में एक प्रमाणीकरण अभ्यास होगा, जिसमें दोनों देशों के सैनिक संयुक्त अभियान में अपनी सीखी हुई क्षमताओं का प्रदर्शन करेंगे। 'मैत्री' युद्धाभ्यास से दोनों सेनाओं के बीच लंबे समय से चले आ रहे मैत्रीपूर्ण संबंधों के और प्रगाढ़ होने की उम्मीद है।
इनपुट: IANS



