शुक्रवार, 21 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
मध्यप्रदेश

मध्य प्रदेश: पूर्वी जिलों में भारी बारिश से बाढ़ जैसे हालात, रीवा में 4000 से ज्यादा लोग बचाए गए

मध्य प्रदेश के पूर्वी हिस्से में लगातार हो रही बारिश ने कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात पैदा कर दिए हैं, जिससे आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, रीवा, सतना…

मध्य प्रदेश: पूर्वी जिलों में भारी बारिश से बाढ़ जैसे हालात, रीवा में 4000 से ज्यादा लोग बचाए गए
(फोटो: IANS)

मध्य प्रदेश के पूर्वी हिस्से में लगातार हो रही बारिश ने कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात पैदा कर दिए हैं, जिससे आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, रीवा, सतना, पन्ना और डिंडोरी जैसे जिले सबसे ज्यादा प्रभावित हैं, जहां नदियां उफान पर हैं और कई इलाके पानी में डूब गए हैं। प्रशासन ने राहत और बचाव कार्य तेज कर दिए हैं।

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बाढ़ की सबसे गंभीर स्थिति रीवा जिले में देखी जा रही है। यहां शुक्रवार तक बाढ़ में फंसे 4,000 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित निकालकर राहत शिविरों में पहुंचाया गया। जिला प्रशासन ने कुल 27 राहत शिविर बनाए हैं, जिनमें लगभग 3,000 लोगों ने शरण ली है। राजस्व, पुलिस और बचाव दल की टीमें लगातार प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी कर रही हैं।

नदियों का बढ़ता जलस्तर और बचाव कार्य

जिले के मऊगंज में अष्टभुजा नदी का पानी नैगढ़ी गांव में घुस गया, जिससे अमृत योजना के तहत काम कर रहे चार मजदूर फंस गए। दुर्भाग्य से, इनमें से एक मजदूर तेज बहाव में बह गया। इसी तरह, डिंडोरी में खेरमेर नदी का जलस्तर बढ़ने से डिंडोरी-मंडला स्टेट हाईवे पर यातायात रोकना पड़ा क्योंकि पानी पुल के ऊपर से बह रहा था। चित्रकूट में भी मंदाकिनी नदी का पानी बाजार तक पहुंच गया है, जिसके चलते पर्यटकों के लिए गोदावरी गुफाएं बंद कर दी गई हैं।

प्रशासनिक कदम और मौसम का पूर्वानुमान

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए, डिंडोरी और मैहर में 12वीं कक्षा तक के सभी स्कूल और आंगनवाड़ी केंद्र बंद कर दिए गए हैं। पन्ना में भी इसी तरह के एहतियाती कदम उठाए गए हैं। मौसम विभाग (IMD) ने पूर्वानुमान जताया है कि राज्य में 25 अगस्त तक बारिश का दौर जारी रहेगा, खासकर पूर्वी हिस्से में भारी बारिश की आशंका है।

आंकड़ों के अनुसार, मध्य प्रदेश में अब तक 599 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है, जो इस अवधि के सामान्य औसत 675.1 मिलीमीटर से 11 प्रतिशत कम है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इस बारिश का कारण पूर्वोत्तर मध्य प्रदेश पर बना कम दबाव का क्षेत्र है।

इनपुट: IANS

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News4Social मध्य प्रदेश डेस्क

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