क्या है शरद पूर्णिमा की पूजा विधि और क्या इस पूजा से होगा आपके सब दुख-दर्द दूर?
शरद पूर्णिमा का खास महत्व होता है. अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा कहा जाता है.
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शरद पूर्णिमा का खास महत्व होता है. अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा कहा जाता है.
भगवान शिव की पूजा का बड़ा ही महत्व है। एक लोटा जल चढ़ा देने से प्रसंन्न होने वाले भगवान शिव की पूजा बड़ी-बड़ी बाधाओं को दूर कर देती है।
शास्त्रों के मुताबिक ज्ञान के देवता गुरु बृहस्पति माने गए हैं। बृहस्पति पूजा न केवल वैवाहिक दोष, बल्कि हर तरह से दक्षता, समृद्धि व शांति देने वाली मानी गई है।
वास्तु विज्ञान में बताया गया है कि हमारे आस-पास और घर में मौजूद चीजों का किसी न किसी रुप में हम पर जरुर असर होता है।
कबीरदास जी हिन्दी साहित्य के एक प्रकंड विद्धान, महान कवि एवं एक अच्छे समाज सुधारक थे।
हिन्दू शास्त्रों के अनुसार सोमवार के दिन भगवान शिव जी की पूजा-अर्चना करने का विधान है। इस व्रत को शिव पूजा के बाद सोमवार व्रत की कथा सुननी आवश्यक है।
घर में यदि किसी भी प्रकार की उठापठक चल रही है तो दो तरह की चीजें हो सकती हैं।
धर्म की संकल्पना को लेकर गांधी की समझ कितनी स्पष्ट और समाहक थी, उसकी एक बानगी देखिये - 'यह धर्म का सौभाग्य अथवा दुर्भाग्य है कि वह कोई सत्तारोपित मत नहीं है.