तृणमूल कांग्रेस में भारी घमासान, ममता बनर्जी अध्यक्ष पद से हटाई गईं, बागी गुट ने अरूप रॉय को सौंपी कमान
पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा उलटफेर हुआ है। तृणमूल कांग्रेस के बागी गुट ने एक बैठक कर ममता बनर्जी को अध्यक्ष पद से हटा दिया है। ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में 60 विधायकों ने अरूप रॉय को नया अध्यक्ष नियुक्त किया है। बागी खेमे ने पार्टी संविधान का हवाला देते हुए अपने कदम को सही ठहराया और अब मामला निर्वाचन आयोग के पास जाएगा।
मुख्य बिंदु
कोलकाता, पश्चिम बंगाल: पश्चिम बंगाल की सियासत में सियासी पारा चढ़ गया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) में एक बड़ी बगावत के चलते पार्टी दो फाड़ होती दिख रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 23 जून 2026 को बजट सत्र खत्म होने के ठीक बाद, विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट ने एक अहम बैठक की। इस बैठक में ममता बनर्जी को पार्टी अध्यक्ष के पद से हटाने का ऐलान कर दिया गया और उनकी जगह अरूप रॉय को नया अध्यक्ष घोषित किया गया है। इस फैसले ने राज्य की राजनीति में खलबली मचा दी है।
बागी गुट ने बुलाई बैठक, लिए गए बड़े फैसले
मिली जानकारी के मुताबिक, यह बैठक कोलकाता के न्यू टाउन स्थित एक होटल में आयोजित की गई थी। इसमें TMC के करीब 60 विधायक और कोलकाता के लगभग 70 पूर्व पार्षद शामिल हुए। बैठक में पार्टी के भविष्य को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए, जिससे पार्टी का आंतरिक घमासान खुलकर सतह पर आ गया है।
बैठक में लिए गए प्रमुख निर्णय इस प्रकार हैं:
- अरूप रॉय को सर्वसम्मति से पार्टी का नया अध्यक्ष घोषित किया गया।
- फिरहाद हकीम, रथिन घोष और सबीना यास्मीन को पार्टी का उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया।
- अभिषेक बनर्जी को पार्टी से सस्पेंड करने का फैसला लिया गया।
- 30 सदस्यों वाली एक नई राष्ट्रीय कार्यसमिति का गठन किया गया।
- ममता बनर्जी को अध्यक्ष पद से हटाते हुए उन्हें पार्टी के 'मुख्य सलाहकार' का पद ऑफर किया गया है।
बगावत के पीछे पार्टी संविधान का हवाला
बागी गुट के नेता ऋतब्रत बनर्जी ने अपने इस कदम को पार्टी के संविधान के अनुसार बताया है। उन्होंने दावा किया कि TMC के संविधान की धारा-20 में यह साफ लिखा है कि हर तीन साल में राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक होनी अनिवार्य है। उनके अनुसार, पार्टी में आखिरी बार ऐसी बैठक साल 2022 में हुई थी, जिसके बाद से कोई बैठक नहीं बुलाई गई। इसी को आधार बनाकर बागी खेमे ने विशेष सत्र बुलाकर यह कार्रवाई की है। ऋतब्रत बनर्जी ने कहा, "हमने जो भी किया है, वह तृणमूल कांग्रेस के संविधान के नियमों के तहत किया है।"
अब निर्वाचन आयोग करेगा असली-नकली का फैसला
इस बड़ी सियासी उठापटक के बाद अब गेंद निर्वाचन आयोग के पाले में है। ऋतब्रत बनर्जी ने स्पष्ट किया है कि इस विशेष सत्र की पूरी कार्यवाही और लिए गए फैसलों की जानकारी भारत निर्वाचन आयोग को दी जाएगी। उन्होंने कहा, "पार्टी के नियमों के अनुसार कार्रवाई की गई है। अब निर्वाचन आयोग को ही यह तय करना है कि कौन सही है और कौन गलत।"
यह भी उल्लेखनीय है कि यह बगावत अचानक नहीं हुई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, पिछले दिनों जब विपक्ष के नेता का चुनाव होना था, तब 80 में से 58 विधायकों ने ऋतब्रत बनर्जी के दावे का समर्थन किया था। इसके अलावा, पार्टी के 28 लोकसभा सदस्यों में से 20 पहले ही TMC से अलग होकर राष्ट्रवादी नागरिक पार्टी (NCPI) में विलय कर चुके हैं और उन्होंने भाजपा के नेतृत्व वाले NDA को अपना समर्थन देने की घोषणा भी कर दी है।



