जानिए सरस्वती पूजा करने की विधि और क्या है उसका शुभ मुहूर्त?
सरस्वती पूजा का त्योहार हर साल माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। बसंत पंचमी के दिन से ही वसंत ऋतु की शुरूआत होती है।
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सरस्वती पूजा का त्योहार हर साल माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। बसंत पंचमी के दिन से ही वसंत ऋतु की शुरूआत होती है।
शरद पूर्णिमा माता लक्ष्मी का प्रमुख पर्व माना जाता है जब चंद्रमा 16 कलाओं से युक्त होता है। इस दिन मृत्यु को लेकर कोई धार्मिक मान्यता नहीं है, पर इसे रोग निदान और आरोग्य लाभ का दिन माना गया है।
शरद ऋतु की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा कहते हैं। माना जाता है कि शरद पूर्णिमा का व्रत करने से व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
शरद पूर्णिमा का खास महत्व होता है. अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा कहा जाता है.
शास्त्रों के मुताबिक ज्ञान के देवता गुरु बृहस्पति माने गए हैं। बृहस्पति पूजा न केवल वैवाहिक दोष, बल्कि हर तरह से दक्षता, समृद्धि व शांति देने वाली मानी गई है।
वास्तु विज्ञान में बताया गया है कि हमारे आस-पास और घर में मौजूद चीजों का किसी न किसी रुप में हम पर जरुर असर होता है।
कबीरदास जी हिन्दी साहित्य के एक प्रकंड विद्धान, महान कवि एवं एक अच्छे समाज सुधारक थे।
धर्म की संकल्पना को लेकर गांधी की समझ कितनी स्पष्ट और समाहक थी, उसकी एक बानगी देखिये - 'यह धर्म का सौभाग्य अथवा दुर्भाग्य है कि वह कोई सत्तारोपित मत नहीं है.