भगवान को 56 भोग ही क्यों चढाएं जाते है, 55 या 57 क्यों नहीं…?
आप में से बहुत से लोग ने हमारे पास यह सवाल भेजा की भगवन को 56 भोग ही क्यों चढ़ाये जाते है..
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आप में से बहुत से लोग ने हमारे पास यह सवाल भेजा की भगवन को 56 भोग ही क्यों चढ़ाये जाते है..
नवरात्रि के दिनों में मां कात्यायनी देवी की पूजा की जाती है. इन देवी की पूजा से वैसे तो कई निवारण होते है.
पुराणा अनुसार पितरों को दो श्रेणियों में रखा जा सकता है. पहला है दिव्य पितर और मनुष्य पितर.
सभी लोग जानते है कि भागवत् गीता को दुनिया का सबसे बड़ा ग्रंथ माना जाता है.
खीर भवानी, भवानी देवी का एक नाम है जिनका प्रसिद्ध मंदिर जम्मू व कश्मीर के गान्दरबल ज़िले में तुलमुला गाँव में स्थित है ऐसा माना जाता है कि खीर भवानी देवी की…
किसी भी शुभ काम को शुरू करने से पहले या फिर किसी भी अच्छे काम को शुरू करने से पहले लोग भगवान का नाम लेते है या फिर अपने घरो में पूजा पाठ करवाते है.
भगवान शिव व विष्णु से जुड़ी अनेक कथाएं हमारे धर्म ग्रंथों में मिलती है। ऐसी ही एक रोचक कथा कार्तिक शुक्ल चतुर्दशी से भी जुड़ी है।
पौराणिक काल में एक थी लड़की। नाम था वृंदा। राक्षस कुल में उसका जन्म हुआ था। वृंदा बचपन से ही भगवान विष्णु जी की परम भक्त थी।