City Council Election Results Faridabad: होडल में कांग्रेस-बीजेपी के बागियों ने डुबो दी अपनों की कश्ती

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City Council Election Results Faridabad: होडल में कांग्रेस-बीजेपी के बागियों ने डुबो दी अपनों की कश्ती

फरीदाबाद : नगर परिषद के चुनाव परिणाम ने प्रत्याशियों के साथ ही दिग्गजों को भी जमीनी हकीकत दिखा दी है। कांग्रेस नेता व पूर्व मंत्री करण दलाल और प्रदेश अध्यक्ष उदय भान अपने ही गढ़ में पार्टी का खाता नहीं खुलवा सके। जबकि, दोनों नेताओं ने अपने समर्थित प्रत्याशियों के लिए जमकर प्रचार किया था। वहीं, पलवल में तो बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं ने जोर लगाकर कमल खिला लिया, लेकिन होडल में कांग्रेस और बीजेपी के बागियों ने सारे समीकरण बिगाड़ दिए। यहां कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार तीसरे और बीजेपी उम्मीदवार 5वें नंबर पर ही आ सके।

दूसरी तरफ, दोनों जगह पहली बार चुनावी मैदान में उतरी आम आदमी पार्टी अपनी उपस्थिति दर्ज कराने में सफल रही, लेकिन इंडियन नैशनल लोकदल इस दौड़ में फिसड्डी साबित हो गई। इनेलो को होडल में प्रत्याशी ही नहीं मिला था। लिहाजा यहां पार्टी चुनाव मैदान से ही दूर रही। वहीं, पलवल में पार्टी की हालत बेहद खराब रही। कुछ दिनों से इनेलो प्रदेश भर में सदस्यता अभियान चला रही थी। पलवल और फरीदाबाद में सीनियर नेताओं की कई बैठकें हो चुकी थीं। इसके बावजूद पार्टी बेहतर प्रदर्शन नहीं कर सकी।

आप ने बसपा-इनेलो को पछाड़ा
पहली बार चेयरमैन का चुनाव जनता को करना था और पहली बार ही पार्टियों ने सिंबल पर ये चुनाव लड़े। आम आदमी पार्टी का जिले में मजबूत संगठन भी नहीं है और बड़े नेता प्रचार में भी नहीं आए। ऐसे में उसके प्रत्याशी भले जीत नहीं सके, लेकिन अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने से नहीं चूके। पलवल में चेयरमैन पद के लिए आप प्रत्याशी नवीन रोहिल्ला चौथे नंबर पर रहीं, जबकि होडल में पार्टी के प्रत्याशी संजय मित्तल छठे नंबर पर रहे। पार्टी ने जिले में पहले से जमी इनेलो और बसपा जैसे दलों से ज्यादा वोट पाकर उन्हें पछाड़ दिया है। माना जा रहा है कि इसका असर फरीदाबाद के नगर निगम चुनावों में भी देखने को मिल सकता है।

नहीं बदला कांग्रेस का ढर्रा
हाल ही में कांग्रसे ने प्रदेश अध्यक्ष को बदलकर उदयभान को जिम्मेदारी दी है, लेकिन ढर्रा अब तक नहीं बदला है। माना जा रहा है कि पार्टी को अपनी स्थिति का अंदाजा था, लिहाजा सिंबल पर चुनाव लड़ने की हिम्मत नहीं जुटा सकी। ऐसे में कांग्रेस ने अपने समर्थकों को समर्थन दिया। इसमें भी पार्टी प्रत्याशियों में सुलह कराकर एका नहीं करा सकी। नतीजा ये रहा कि खुद प्रदेश अध्यक्ष के गृह नगर होडल में ही कांग्रेस से ताल्लुक रखने वाले 3 लोग एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़े। इनमें से एक मेजर सिंह ने बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष ओमप्रकाश धनखड़ के दौरे के समय बीजेपी को समर्थन देकर चुनाव से हटने की घोषणा कर दी। वहीं, दूसरे बागी उदय सिंह डटे रहे और कांग्रेस के समर्थित प्रत्याशी ब्रज भूषण से 42 वोट अधिक ले आए। उदय सिंह को 5827 और ब्रज भूषण को 5785 वोट मिले। इंद्रेश कुमारी ने 9629 वोट पाकर जीत हासिल कर ली। अगर कांग्रेस से ताल्लुक रखने वाले उदय सिंह और ब्रज भूषण एक हो जाते तो शायद चुनाव परिणाम कुछ और होते। पलवल में कांग्रेस के पूर्व मंत्री करण सिंह दलाल ने वीर कुमार को जिताने के लिए खूब पसीना बहाया, लेकिन वह भी हार गए।

बीजेपी से छिन गया होडल
होडल में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष उदयभान के बेटे राजगोपाल पहले चेयरमैन रह चुके हैं। उनके बाद बीजेपी के समर्थन से ही आशा तायल चेयरपर्सन बनीं। पलवल में बीजेपी की इंदू बाला चेयरपर्सन रहीं। बीजेपी पलवल में तो सीट बचाने में कामयाब रही है, लेकिन होडल हाथ से निकल गया। दोनों ही जगह बीजेपी के बागी मैदान में थे। पलवल में पूर्व विधायक सुभाष चौधरी ने पार्टी के उम्मीदवार यशपाल के बजाय निर्दलीय धीरज कुमार को समर्थन दिया। धीरज दूसरे नंबर पर रहे। बीजेपी नेता नेत्रपाल ने भी निर्दलीय चुनाव लड़ा।

पलवल में बगावत को कृष्णपाल गुर्जर, बीजेपी विधायक और प्रदेश अध्यक्ष ओमप्रकाश धनखड़ डैमेज कंट्रोल कर गए। लिहाजा पार्टी जीत गई, लेकिन होडल में ऐसा नहीं हो सका। होडल में बीजेपी प्रत्याशी लखनलाल के विरोध में पार्टी के ही जिला उपाध्यक्ष जगमोहन गोयल बतौर निर्दलीय लड़े और लखनलाल से ज्यादा वोट लेकर आए। जगमोहन को 5343 और लखनलाल को 4198 वोट मिले।

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