शिवसेना पर अधिकार: सुप्रीम कोर्ट में शिंदे गुट ने मांगा 4 घंटे का समय, अगली सुनवाई 15 सितंबर को
महाराष्ट्र में शिवसेना के नाम और चुनाव चिह्न 'तीर-कमान' पर अधिकार को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी है। बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान एकनाथ शिंदे गुट ने उद्धव ठाकरे पक्ष के दावों को तथ्यात्मक रूप…
महाराष्ट्र में शिवसेना के नाम और चुनाव चिह्न 'तीर-कमान' पर अधिकार को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी है। बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान एकनाथ शिंदे गुट ने उद्धव ठाकरे पक्ष के दावों को तथ्यात्मक रूप से गलत बताया। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, शिंदे गुट के वकील ने अपनी दलीलें पेश करने के लिए अदालत से कम से कम चार घंटे का समय मांगा, जिसके बाद बेंच ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 15 सितंबर की तारीख तय की।
यह मामला मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच के समक्ष चल रहा है। गौरतलब है कि चुनाव आयोग ने एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले गुट को ही असली शिवसेना के रूप में मान्यता देते हुए 'तीर-कमान' का निशान आवंटित किया था। उद्धव ठाकरे ने चुनाव आयोग के इसी फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।
शिंदे गुट की प्रमुख दलीलें
शिंदे गुट की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील नीरज किशन कौल ने पार्टी में आंतरिक लोकतंत्र के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने तर्क दिया कि धन के लेन-देन या धांधली की आशंका के कारण आंतरिक चुनावों से बचना सही नहीं है। उन्होंने कहा, "क्या एक जिम्मेदार राजनीतिक दल को केवल इसलिए आंतरिक चुनावों से बचना चाहिए क्योंकि इसमें धन का लेन-देन हो सकता है? धांधली या गड़बड़ी का समाधान उसे सुधारना चाहिए, न कि चुनावों को खत्म करना।"
वकील ने आगे कहा, "इस बात की भी कोई गारंटी नहीं है कि जो व्यक्ति चुनाव जीतने के लिए पैसे देने को तैयार है, वह पद पाने के लिए पैसे नहीं देगा।" उन्होंने जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं के लिए चुनावों को सबसे महत्वपूर्ण बताया, क्योंकि वे ही जनता की नब्ज समझते हैं और पार्टी की नीतियों को आकार देने में मदद करते हैं।
'पक्ष प्रमुख' पद और संविधान पर तर्क
शिंदे गुट ने ठाकरे पक्ष के इस दावे को भी भ्रामक बताया कि 'पक्ष प्रमुख' का पद 2018 में ही बनाया गया था। उन्होंने अदालत को बताया कि 2012 में बालासाहेब ठाकरे के निधन के बाद 'शिवसेना प्रमुख' का पद सम्मानपूर्वक फ्रीज कर दिया गया था और उसके बाद 'पक्ष प्रमुख' का पद सृजित किया गया था। उन्होंने यह भी बताया कि 1999 में शिवसेना का संविधान चुनाव आयोग को सौंपा गया था, लेकिन बालासाहेब के निधन के बाद पार्टी के संवैधानिक ढांचे में मौलिक रूप से बदलाव किए गए।
अगली सुनवाई 15 सितंबर को
वरिष्ठ वकील नीरज किशन कौल ने कहा कि सुनवाई को दस दिन हो चुके हैं और उन्हें अपनी दलीलें पूरी करने के लिए कम से कम चार घंटे का समय चाहिए, जिसमें से दो घंटे अयोग्यता मामले पर बहस के लिए लगेंगे। अदालत ने उनके अनुरोध को स्वीकार करते हुए मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को दोपहर दो बजे के लिए निर्धारित की है।
इनपुट: IANS



