NSE IPO की लिस्टिंग से पहले उत्साह ठंडा, ग्रे मार्केट प्रीमियम ₹43 पर गिरा
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के बहुप्रतीक्षित आईपीओ की शेयर बाजार में लिस्टिंग से ठीक पहले निवेशकों का उत्साह ठंडा पड़ता दिख रहा है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, लिस्टिंग से एक दिन पहले…
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के बहुप्रतीक्षित आईपीओ की शेयर बाजार में लिस्टिंग से ठीक पहले निवेशकों का उत्साह ठंडा पड़ता दिख रहा है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, लिस्टिंग से एक दिन पहले बुधवार को ग्रे मार्केट में इसका प्रीमियम (GMP) गिरकर मात्र 43 रुपये प्रति शेयर पर आ गया है, जिससे अब बड़े लिस्टिंग गेन की उम्मीदें कमजोर पड़ गई हैं।
इस नवीनतम जीएमपी के आधार पर, एनएसई के शेयरों की लिस्टिंग कीमत लगभग 1,828 रुपये होने का अनुमान है। यह आईपीओ के ऊपरी प्राइस बैंड 1,785 रुपये की तुलना में सिर्फ 2.41% का प्रीमियम है। यह स्थिति उस शुरुआती उम्मीद से बिल्कुल अलग है जब आईपीओ खुलने से पहले इसका जीएमपी 145 रुपये तक पहुंच गया था और निवेशक 8% से अधिक के मुनाफे की उम्मीद कर रहे थे।
निवेशकों ने दिखाई थी जबरदस्त दिलचस्पी
17 से 21 सितंबर तक चले इस आईपीओ को निवेशकों से शानदार प्रतिक्रिया मिली थी। 22,568.94 करोड़ रुपये के इस पब्लिक इश्यू को कुल 5.71 गुना सब्सक्राइब किया गया था। एक्सचेंज के आंकड़ों के मुताबिक, 8.86 करोड़ शेयरों के बदले 50.58 करोड़ से ज्यादा शेयरों के लिए बोलियां प्राप्त हुईं, जिनका कुल मूल्य 90,287.33 करोड़ रुपये था।
इसमें संस्थागत निवेशकों (QIB) ने सबसे ज्यादा उत्साह दिखाया और उनका हिस्सा 12.68 गुना भरा। वहीं, गैर-संस्थागत निवेशकों (NII) की श्रेणी 6.55 गुना और खुदरा निवेशकों (RII) की श्रेणी 1.39 गुना सब्सक्राइब हुई। शेयरों का आवंटन 22 सितंबर को पूरा हो चुका है और इनकी लिस्टिंग 24 सितंबर को बीएसई पर होने की उम्मीद है।
कंपनी का कारोबार और बाजार में पकड़
एनएसई ने आईपीओ के लिए 1,700 से 1,785 रुपये का प्राइस बैंड तय किया था। यह इश्यू पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल (OFS) था, यानी कंपनी ने कोई नया शेयर जारी नहीं किया, बल्कि मौजूदा शेयरधारकों ने 12.64 करोड़ शेयरों की बिक्री की।
कंपनी की आय का एक बड़ा हिस्सा ट्रांजैक्शन चार्ज से आता है। वित्त वर्ष 2025-26 में परिचालन आय का 78.65% हिस्सा इसी शुल्क से आया था। इसमें भी अकेले ऑप्शंस ट्रेडिंग का योगदान 60% से अधिक था, जो डेरिवेटिव सेगमेंट पर इसकी मजबूत निर्भरता को दिखाता है। बाजार हिस्सेदारी के मामले में भी एनएसई का दबदबा कायम है, हालांकि इक्विटी ऑप्शंस में इसे कुछ प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है।
इनपुट: IANS



